सलमा धीरे धीरे आकर मेरे बगल में झिझकते और शर्माती हुई ख़डी हो गई। पहले तो मैंने उसे तवज्जो नहीं[...]
Category: हिन्दी कहानी
बबली की पाठशाला : मो. ज़ाहिद हुसैनबबली की पाठशाला : मो. ज़ाहिद हुसैन
संज्ञानात्मक विकास एवं शिक्षा-1( प्रथम पाठशाला) बच्चे जब पैदा होते हैं तो वे नये परिवेश में रोते हैं। मां जब[...]
सुनीता का त्याग : लवली कुमारीसुनीता का त्याग : लवली कुमारी
खट-खट की आवाज सुन कर सुनीता ने कहा, “नैना देखो तो दरवाजा पर कोई आया है।” “मां, पार्सल वाले भैया[...]
असफलता से सफलता तक- सुरेश कुमार गौरवअसफलता से सफलता तक- सुरेश कुमार गौरव
रवि एक मेहनती लेकिन साधारण छात्र था। माध्यमिक की परीक्षा में असफल होने के बाद उसकी दुनिया जैसे अंधकारमय हो[...]
परीक्षा का सच- सुरेश कुमार गौरवपरीक्षा का सच- सुरेश कुमार गौरव
गाँव के छोटे से स्कूल में पढ़ने वाला सूरज पढ़ाई में औसत था। परीक्षा का नाम सुनते ही उसके माथे[...]
जीवन का दीपक- सुरेश कुमार गौरवजीवन का दीपक- सुरेश कुमार गौरव
गाँव के अंतिम छोर पर एक टूटी-फूटी झोपड़ी में बुजुर्ग हरिश्चंद्र रहते थे। उम्र के अंतिम पड़ाव पर उनका न[...]
रजिया की शादी- नीतू रानीरजिया की शादी- नीतू रानी
रजिया की माँ रजिया की शादी बारह वर्ष में करवा देना चाहती थी। यानी कि “बाल विवाह”, क्योंकि अगर रजिया[...]
हरित धरा- रुचिकाहरित धरा- रुचिका
आज सुबह से ही हर जगह बड़ी धूमधाम थी। फावड़ा, कुदाल, बाल्टी मग और नर्सरी से लिये कुछ पौधों के[...]
चहारदीवारी तोड़कर निकली मनीषा- नीतू रानीचहारदीवारी तोड़कर निकली मनीषा- नीतू रानी
एक हरिजन परिवार में पली-बढ़ी मनीषा।मनीषा का सपना था जो मैं बड़ी होकर पढ़ -लिखकर कुछ बनूँ । लेकिन उसके[...]
छाँव की पंचायत- सुरेश कुमार गौरव छाँव की पंचायत- सुरेश कुमार गौरव
गर्मी की तपती दोपहर थी। खेतों के किनारे सात-आठ वृक्षों के झुंड छाया बिखेर रही थी। उनकी शाखाएँ ऐसे फैलीं[...]