हिन्दी कहानी Archives - गद्य गुँजन

नमक हराम -संजीव प्रियदर्शी

‘रमेश बिल्कुल नमक हराम निकला। कितना समझाया था कि बाबूजी को घर पर रखकर उनकी अच्छी तरह देखभाल किया करना। परन्तु उसने तो बाबूजी को वृद्धाश्रम में ले जाकर छोड़… नमक हराम -संजीव प्रियदर्शीRead more

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धरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शी

रमिया और टुनका दहाड़ें मार कर रो रहे थे। रोते भी क्यों नहीं, जिगर का एक ही तो टुकड़ा था जिसे गंगा मैया ने अपने ओद्र में समा लिया था।टुनका… धरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शीRead more

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संदिग्ध आँखें-विजय सिंह नीलकण्ठ

संदिग्ध आँखें            बाजार से लौटते समय जिग्नेश की बाइक के दाईं मीरर पर किसी गाड़ी के आने का प्रकाश दिखा जो बड़ी तेजी से आ… संदिग्ध आँखें-विजय सिंह नीलकण्ठRead more

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आशीर्वाद-कुमारी निरुपमा

आशीर्वाद           माॅं की तबीयत जब भी खराब होती थी मोनिया को पिंकी दीदी के घर जाना ही होता था। मोनिया की मां परीक्षा के समय… आशीर्वाद-कुमारी निरुपमाRead more

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महर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी-हर्ष नारायण दास

महर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी           राजा उपरिचर, चेदि देश के राजा थे। वे बड़े धार्मिक एवं सत्यप्रतिज्ञ थे। उनके पास प्रचुर धन था। वे… महर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी-हर्ष नारायण दासRead more

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अपनी माटी-कुमारी निरुपमा

अपनी माटी           आरुणि के प्रश्नों का जवाब देते देते-देते उसके पापा कभी-कभी झुंझला कर उसे चुप भी करा देते थे। आज आरुणि पापा और कपिल… अपनी माटी-कुमारी निरुपमाRead more

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भोलवा का कुर्ता-चाँदनी समर

भोलवा का कुर्ता           उसने आंख खोलकर एक बार देखा और फिर अपनी फटी कम्बल खींच ली। सर्दी आज भी बहुत अधिक थी। मगर तभी उसकी… भोलवा का कुर्ता-चाँदनी समरRead more

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मित्रता का मान-कुमारी निरुपमा

मित्रता का मान           विद्यालय में “कृष्ण और सुदामा” नाटक का मंचन किया जाना था। वर्ग सात के अंग्रेजी के किताब का एक लेशन जब से… मित्रता का मान-कुमारी निरुपमाRead more

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