हिन्दी दिवस-हर्ष नारायण दास - गद्य गुँजन

हिन्दी दिवस-हर्ष नारायण दास

Harshnarayan

Harshnarayan

हिन्दी दिवस

          भारत विविधताओं का देश है जहाँ अलग-अलग जाति, लिंग, पंथ, धर्म के लोग रहते हैं। इनके खान-पान, परम्परा, रहन-सहन रीति-रिवाज एवं भाषा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है लेकिन इन सबके बाबजूद भी हमारे देश के ज्यादातर लोग हिन्दी भाषा बोलते हैं क्योंकि हिन्दी एक बेहद सरल और सहज भाषा है जिसे हर व्यक्ति बेहद सरलता के साथ समझ सकता है। इस भाषा की सहजता और सुगमता को देखते हुए इसे हिन्दुस्तान की राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया है।

हिन्दी हिन्दुस्तान की शान मानी जाती है। यह भाषा हमारी अनूठी संस्कृति और संस्कारों का अनूठा प्रतिबिम्ब है। इस भाषा के प्रति हर हिन्दुस्तानी के हृदय में सम्मान है।

14 सितम्बर 1949 को हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया था। इस दिन भारत की संविधान सभा में हिन्दी को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था इसलिए तब से लेकर आज तक इसे हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विश्व में हिन्दी साहित्य दुनिया के सबसे समृद्ध साहित्य के रूप में जाना जाता है। भारतेन्दु हरिश्चन्द, देवकीनंदन खत्री, गोपालराम गहमरी, श्री निवास दास, श्रद्धाराम फिलोरी, बालकृष्ण भट्ट, अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध, माखनलाल चतुर्वेदी, गोपालसिंह नेपाली, रामधारी सिंह दिनकर, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, महावीर प्रसाद द्विवेदी, लज्जाराम शर्मा, किशोरी लाल गोस्वामी इत्यादि जैसे महान साहित्यकारों ने अपने महान विचारों और भावनाओं को हिन्दी भाषा में इस्तेमाल कर समझाया है और लोगों के अन्दर जीवन जीने के प्रति एक नयी चेतना पैदा की है। इसके साथ ही हिन्दी भाषा के प्रति लोगों को प्रोत्साहित भी किया है। वहीं हिन्दी का साहित्य आज व्यक्ति गत राजनीतिक एवं सामाजिक अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त हथियार के रूप में उभरा है।

हिन्दी भाषा हमारे देश के युवाओं में नए विचारों को जन्म देने में मदद करती है। इसके माध्यम से हम भारतीय अपनी भावनाओं को अच्छी तरह से उजागर कर सकते हैं। हिन्दी भाषा न सिर्फ संवाद को सरल और सहज बना देती है बल्कि लोगों को आपस में जोड़ने का भी काम करती है। हिन्दी भाषा हम सभी भारतीयों की पहचान है और भारतीय संस्कृति की विरासत है लेकिन हिन्दी बोलने वाले को तुच्छ नजरिये से देखा जाता है जो कि बेहद निन्दनीय है।हिन्दी भाषा को उतना मान-सम्मान नहीं दे पा रहे हैं जितना कि किसी भी देश को अपनी राष्ट्रभाषा को देना चाहिए किन्तु आज भी कई लोग ऐसे हैं, कई संस्था ऐसी हैं जो हिन्दी भाषा के महत्व को बढ़ाने के लिए हिन्दी के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है।

जरा हिन्दी के बारे में इन पंक्तियों को देखिए-

राष्ट्र के माथे की बिन्दी है ये हिन्दी,
संस्कृत की एक लाडली बेटी है ये हिन्दी।
बहनों को साथ लेकर चलती है ये हिन्दी।
सुन्दर है, मनोरम है, मीठी है, सरल है।
वैज्ञानिक है और अनूठी है ये हिन्दी।
तुलसी, कबीर, मीरा ने इसमें लिखा है।
कवि सूर के सागर की गागर है ये हिन्दी।
यूँ तो देश में कई भाषाएँ और हैं

पर भारत के माथे की बिन्दी है ये हिन्दी।
हिन्दुस्तान की शान है हिन्दी,
हर हिन्दुस्तानी की पहचान है हिन्दी।
एकता की अनुपम परम्परा है हिन्दी।
हर दिल का अरमान है हिन्दी।।
विविधताओं से भरे इसमें भाषाओं की फुलवारी लगी है जिसमें सबसे प्यारी हिन्दी हमारी मातृभाषा है।हिन्दी दिवस पर आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं।

हर्ष नारायण दास

मध्य विद्यालय घीवहा (फारबिसगंज)
अररिया
मो० न० 8084260685

Spread the love

Leave a Reply

%d bloggers like this: