हिन्दी दिवस-प्रियंका दुबे - गद्य गुँजन

हिन्दी दिवस-प्रियंका दुबे

Priyanka

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हिन्दी दिवस

          मानव जाति श्रेष्ठता की उपाधि से अलंकृत हो स्वयं को अन्य जीवों की श्रेणी में सर्वोपरि मानता है। अभिव्यक्ति की क्षमता मनुष्य को पूरा करने में अद्वितीय भूमिका निभाती है। भाषा के अभाव में शायद अभिव्यक्ति की कल्पना व्यर्थ हो जाएगी।
भाषा अभिव्यक्ति की अनंत असीम विस्तार की पतवार थामें हमें नित नए आयाम से साक्षात्कार कराती है। भाषा के अभाव में जीवन की नैया को खेना बहुत ही कठिन हो जाएगा। मन में विचरता हुआ विचारों का विनिमय समरसता को देखने का अवसर देती है। भाषा सम्प्रेषण का एक अद्भुत माध्यम है।
अभिव्यक्ति चाहे वो विचारों की हो या भावनाओं की प्रत्येक दृष्टी से आवश्यक है। चाहे माध्यम कोई भी भाषा हो।

14 सितंबर का दिन हिन्दी भाषियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं। यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का पल था जब भारत की संविधान सभा ने हिंदी भाषा को देश की आधिकारिक राजभाषा के रूप में अंगीकार किया। तब से देवनागरी लिपि में लिखी जानी वाली भाषा हिन्दी राजभाषा बन गयी साथ ही 14 सितंबर का दिन ऐतिहासिक बन गया। अनुच्छेद 343 के अंतर्गत हिन्दी को राजभाषा की संज्ञा से विभूषित किया गया जो आज अपनी शुद्धता के लिए संघर्षरत है।

हिन्दी एक विश्वविख्यात भाषा है। हमारी मातृभाषा हिन्दी की शुद्धता वर्तमान में खतरे में है। यही नहीं हमारी एकता और अखंडता की सूचक हिन्दी भाषा का स्थान वर्तमान समय में अंग्रेजी ने ग्रहण कर लिया है। भय है कि मुख्य भाषा सम्प्रेषण के पथ पे पिछड़ कर ना रह जाए। गर्व की भाषा का प्रयोग गर्व से करना चाहिए। हिन्दी भाषा हीं हमारा अभिमान है।अपनी मातृभाषा की प्रगति का दायित्व प्रत्येक भारतीय पर है। अपने कर्तव्यों का निर्वहन ही अभीष्ट सफलताओं के पथ को प्रकाशित करेंगी।

निज भाषा उन्नति अहे,
सब उन्नति के मूल,
बिन निज भाषा के ज्ञान के,
मिटत न हिय के सूल।

जिस प्रकार मूल से अलग होकर वृक्ष जीवन हीन हो जाता है ठीक उसी प्रकार मातृभाषा के बिना देश का नागरिक पथ से भटके पथिक के सदृश हो जाता है।

प्रियंका दुबे
मध्य विद्यालय फरदा जमालपुर

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