काली ..अँधेरी रात…मूसलाधार बारिश हो रही थी ….बिजली की चमक और मेघ के तेज गर्जन . उस गर्जन के साथ रमेश बाबू और उनकी पत्नी का कलेजा बैठा जा रहा था … आखिर हो भी क्यों नहीं, उसके इकलौते बेटे आदित्य का कार से एक्सीडेंट हो गया था और , उसके शरीर से बहुत सारा खून बह चुका था . ऐसे में उसे खून की सख्त जरूरत थी.पर ओ- निगेटिव ब्लड ग्रुप होने के कारण उसे कहीं से भी उम्मीद की किरण नहीं दिखाई पड़ रही थी .अस्पताल में आदित्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था.
रमेश बाबू को हर ओर से निराशा ही हाथ लग रही थी . शहर का एकमात्र जो ब्लड बैंक था वहाँ भी उस समय ओ- निगेटिव ब्लड ग्रुप नहीं था . जोरों की बारिश हो रही थी .बारिश के साथ-साथ आँखों के सामने उसकी सारी उम्मीदें भी बह रही थी .
अपने इकलौते बेटे को अपनी आँखों के सामने तिल -तिल मरता देख माँ- बाप की आँखों से आँसू रोके नहीं रूक रहे थे. इतना पैसा होने के बावजूद वे लोग बेबस और लाचार से हो गये थे .उनलोगों को कुछ नहीं सूझ रहा था कि कैसे अपने बेटे की जान बचाई जा सके.
तभी उसकी नौकरानी कमला जो कि उसके यहाँ काम कर अपना गुजारा करती थी उसने दबी आवाज़ में कहा , “मालकिन अगर आप चाहें तो मेरा खून चेक करवा सकते हैं ..”
इतना सुन आशा की एक हल्की सी किरण उन्हें दिखाई दी . हर तरफ से निराश हो चुके रमेश बाबू अपनी नौकरानी को लेकर अस्पताल पहुँचे जहाँ उनके खून की जाँच की गयी . संयोग से नौकरानी का ब्लड ग्रुप ओ- नेगेटिव निकला , जिससे आदित्य की जान बचाई गई .
जिस नौकरानी को मालकिन हमेशा किसी न किसी बात से दुत्कारती रहती थी आज उसके आगे वो हाथ जोड़ सुबक-सुबक कर रोने लगी . यह देख कमला की आँखों से भी आँसू बहने लगे . तब मालकिन ने उसे गले से लगा लिया . उसके बाद से रमेश बाबू ने सोच लिया कि अब हर जरूरतमंदो की यथासंभव मैं मदद करूँगा.
कमला की वजह से से उनलोगों के घर का चिराग आज रौशन हुआ और ये साबित हो गया कि सिर्फ पैसे से ही किसी की जिंदगी नहीं बचाई जा सकती है …..
बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी
प्रखंड कुर्साकांटा जिला अररिया