गद्य गुँजन Uncategorized सन्त कवि तुलसीदास : हर्ष नारायण दास

सन्त कवि तुलसीदास : हर्ष नारायण दास




सन्त कवि तुलसीदास का जन्म उत्तरप्रदेश के राजपुर नामक गाँव में संवत 1554 श्रावण शुक्ल सप्तमी शुक्रवार को हुआ था।उनके पिता का नाम पण्डित आत्माराम दूबे तथा माता का नाम हुलसी था।उनका जन्म मूल नक्षत्र में होने के कारण उनके माता पिता ने उन्हें त्याग दिया था।तुलसीदास जी को प्रसिद्ध सन्त नरहरि दास ने पाला पोसा और शिक्षित किया।उन्होंने संस्कृत वेद और शास्त्रों का गहन अध्ययन किया।तुलसीदास जी को वाल्मीकि का अवतार माना जाता है।तुलसीदास जी रामानन्द सम्प्रदाय के अनुयायी थे।इनका विवाह 1561 ईस्वी में पण्डित दीनबंधु पाठक की पुत्री रत्नावली से हुआ था।संवत1631 के चैत्र शुक्ल रामनवमी को रामचरितमानस का प्रारम्भ किया और दो वर्ष सात महीने और छब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रंथ सम्पन्न हुआ।संवत 1633 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष में रामविवाह के दिन सातों काण्ड पूर्ण हुए।उनके रचनाओं का संक्षिप्त परिचय निम्न है –
रामचरितमानस – गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि है।
2- रामलला नहछू – तुलसी की इस कृति में सोहर छन्द में राम कथा का वर्णन आंशिक रूप से किया गया है।यह ग्रन्थ लोक संस्कृति को प्रकाशित करना है।यह एक मिश्रित भाषा काव्य है।
3- वैराग्य संदीपनी- इस ग्रन्थ में तुलसीदास जी ने वैराग्य सम्बन्धी विचारों का प्रतिपादन किया है।
4- बरवै रामायण – यह कृति 69 वरवे छंदों वाली राम कथा है।यह एक स्फूट काव्य है।
5- पार्वती मंगल – यह काव्य 164 पदों का संग्रह है।इसकी रचना सोहर छन्द और हरिगीतिका छन्द में हुई है। इसकी कथा कालिदास के कुमारसंभव और शिव पुराण से मेल खाती है।
6- जानकी मंगल – इस ग्रन्थ में आठ सोहर छंदों के बाद एक हरिगीतिका छन्द के क्रम में कुल 216 छंदों में लिखी गई जो पूर्वी अवधि का काव्य ग्रन्थ है।
7- रामाज्ञा प्रश्न – यह काव्य कृति उनके नामों से प्राप्त होती है। रामाज्ञा प्रश्न , रामशलाका, रघुवर शलाका, सगुणमाला, सगुणावली , रामायण, सगुणौती।इसका रचनाकाल 1627- 28 मन जाता है।। तुलसीकृत यह काव्य ग्रन्थ शकुन के विचारार्थ लिखा गया ज्योतिष ग्रन्थ है।इस ग्रन्थ में घटनाओं को आधार बनाकर शुभ – अशुभ शकुन पर विचार किया गया है।
8- दोहावली – तुलसीदास जी के इस कृति में राम के प्रति एकनिष्ठ आराधना की गयी है।इसमें कुल 573 पद हैं, जिनमें 22 सोरठे और 551 दोहे हैं। इसमें कवि श्री राम को अपना अवलम्ब मानते हुए ज्ञान भक्ति और वैराग्य का बहुत सुन्दर वर्णन किया गया है।
9- कवितावली – तुलसी का यह काव्य अन्य रचनाओं की तरह जीवनांत तक रचित छंदों का संकलन है। इसमें कवित्त और सवैया छंदों में रामकथा प्रस्तुत की गयी है।कुल369 छंदों में रचित यह ब्रजभाषा काव्य है, इसलिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
10- गीतावली – 238 पदों में रची गयी है।रचना का समय संवत 1630 के मध्य आँका गया है।
11- श्रीकृष्ण गीतावली – इस काव्यग्रंथ में कवि भगवान श्री कृष्ण के लीलाओं का गान किया है इसका रचना काल 1643 से 1660 के मध्य माना जाता है।जिस प्रकार सूरदास ने राम से संबंधित कुछ पदों की रचना की। उसी प्रकार तुलसी दास ने भी कृष्ण से संबंधित कुछ पदों की रचना की। इसकी रचना ब्रजभाषा में हुई है। इसमें कुल 60 पद है।कला की दृष्टि से यह तुलसी की उत्कृष्ट रचनाओं में से एक है।
12- विनय पत्रिका – यह रचना गोस्वामी तुलसीदास जी की वृद्धावस्था की रचना है।इस ग्रन्थ में उन्होंने अपने दार्शनिक विचारो के साथ साथ भक्ति विनय जीवन के प्रति निःसारता के भाव, नश्वर संसार आदि के भाव अभिव्यक्त किये हैं।यह रचना पद्धति गीति शैली है।यह भक्तों का प्रिय ग्रन्थ है।।विनय पत्रिका में आराध्य की महत्ता और भक्त दैन्य बहुत ही सुन्दर ढंग से चित्रांकित हुआ है कुछ पदों में तुलसी दास जी ने जीव, जगत,माया और ब्रह्म से संबंधित दार्शनिक विचार प्रकट किया है ।
अतः गोस्वामी तुलसीदास एक साथ महाकवि,भक्त, दार्शनिक, नीतिज्ञ और समाज सुधारक के रूप में हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि के रूप में स्तुतय है।इनका निधन30 आगस्त 1623 ईस्वी को हो गया।

प्रेषक – हर्ष नारायण दास
फारबिसगंज,अररिया।

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