लघुकथा शहर कई दिनों से अशांत है। लोगों में नफ़रत और भय का माहौल है।कल तक जो लोग आपस में[...]
Tag: संजीव प्रियदर्शी
पुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शीपुरस्कार के हकदार – संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा ”गांव में जो सबसे बढ़कर धर्मनिष्ठ होगा, आज की सभा में वे ही पुरस्कार के हकदार होंगे।” ग्राम-समिति की[...]
परिवार – संजीव प्रियदर्शीपरिवार – संजीव प्रियदर्शी
अपनी सहेली द्वारा ससुराल के बारे में पूछे जाने पर मनोरमा बोलने लगी -‘ अरे राधा, मैं ससुराल में भले[...]
दृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शीदृष्टिकोण – संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा सुनीता अपनी ननद की लड़की की शादी में काफ़ी लल्लो-चप्पो के बाद जाने को राजी हुई थी।ननद शोभा और[...]
दूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शीदूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शी
परामर्श शुल्क के अभाव में दो बार क्लीनिक से लौटाये जाने के बाद वह तीसरी दफे रुपये जुटाकर अपने दस[...]
पगला है- संजीव प्रियदर्शीपगला है- संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा सनोज दास जिस दिन नौकरी में आये,उस दिन उनके हिस्से की ऊपरी कमाई ढ़ाई सौ रुपये बनती थी।साथी अहलकार[...]
समझ- संजीव प्रियदर्शीसमझ- संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा पत्नी ने आकर कहा-‘ अजी सुनते हो! मनोरमा को जिस पूज्य बाबा जी की अनुकंपा से लड़का हुआ है,चलो[...]
अपना-पराया- संजीव प्रियदर्शीअपना-पराया- संजीव प्रियदर्शी
लघुकथा आज देर शाम रघुनाथ जब घर लौटा तो पत्नी राधिका को डरी-सहमी मकान के सामने बरसाती में पाया। कारण[...]
फर्ज- संजीव प्रियदर्शीफर्ज- संजीव प्रियदर्शी
एक लघुकथा चोर-चोर का शोर सुनते ही अपनी जान पर खेलकर भाग रहे लड़के के पीछे लोग दौड़ने लगे थे।[...]
इनकलाब- संजीव प्रियदर्शीइनकलाब- संजीव प्रियदर्शी
ब्रिटिश हुकूमत का काल था।उस समय भारतीय समाज अनेक कुप्रथाओं से दूषित पड़ा था, जिसमें नरबलि का प्रचालन भी जोरों[...]