विटामिन की कहानी विटामिन की हीं जुबानी-बीनू मिश्रा - गद्य गुँजन

विटामिन की कहानी विटामिन की हीं जुबानी-बीनू मिश्रा

Binu

विटामिन की कहानी विटामिन की जुबानी

बीसवीं शताब्दी के आरंभ में ही विटामिनों की खोज हुई। मुख्य रूप से छः प्रकार के विटामिन ऐसे हैं जो हमारे आहार का हिस्सा है और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आइए आज विटामिन की कहानी विटामिन की ही जुबानी सुनते हैं-

विटामिन ए कुछ उछल कूद करते हुए गा रहा था–” मैं हूँ ‘विटामिन ए’ मैं तो मनुष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हूँ। मैं पीले फल, हरी सब्जी तथा दूध-दही या दूध से बने पदार्थ में मुख्य रूप से पाया जाता हूँ। मेरा काम आँख, त्वचा तथा बालों को स्वस्थ बनाना है। मेरी कमी से मनुष्य में रतौंधी नामक बीमारी हो जाती है और त्वचा रूखी-सूखी हो जाती हैं, इसलिए मैं मनुष्य के लिए अति महत्वपूर्ण हूँ। अचानक वह चुप होकर दूसरी तरफ देखने लगा जहाँ विटामिन बी अपने सभी भाई बंधुओं के साथ मिलकर पानी में उछल कूद कर रहा था। उसे देखकर विटामिन ‘ए’ ने पूछा- बहुत खुश नजर आते हो कौन हो तुम?

इस पर विटामिन ‘बी’ ने कुछ यूं जवाब दिया- मैं ”विटामिन बी कांप्लेक्स” हूँ, ये क्रमशः मेरे भाई हैं- बी1, बी2, बी6 और बी12,। मैं तो साबुत अनाज, लाल फल, मांस के जिगर, अंडा, दूध, शहद, गेहूं का आटा तथा हरी सब्जी में पाया जाता हूँ। मेरा काम मांसपेशियों को मजबूत बनाना तथा आरबीसी का निर्माण करना है,”। हमारी कमी से एनीमिया, चर्म रोग और चिड़चिड़ापन हो जाता है। फिर सभी मिलकर मज़े से आगे बढ़े। अचानक पेड़ से ‘धप्प’ की आवाज के साथ पेड़ की एक टहनी से विटामिन ‘सी’ नीचे गिरा और अचानक इतराते हुए इधर से उधर उछल कूद मचाने लगा।
तभी उन लोगों ने उससे पूछा ‘कौन हो तुम’? इस तरह से इतराते हुए उधम क्यों मचाते हो?
तब विटामिन ‘सी’ ने जवाब दिया- मैं विटामिन ‘सी’ हूँ। मैं मनुष्य के लिए बहुत जरूरी हूँ। मैं तो खट्टे फल तथा अंकुरित अनाजों में पाया जाता हूँ। मेरा काम नए रक्त का निर्माण करना तथा शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना होता है। मेरी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है और बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है। चलो हम तीनों दोस्ती कर लेते हैं। इस तरह सभी एक दूसरे को हाथों से पकड़ते हुए घूमते, नाचते, गाते आगे बढ़ गए।

तभी उसे धूप में मस्ती करते हुए रास्ते में विटामिन ‘डी ‘ मिला। तब उसने विटामिन ए, बी तथा सी का जोरदार स्वागत किया।
उसे देखकर विटामिन ‘सी’ ने पूछा- कौन हो तुम भाई?,,,,
तब विटामिन ‘डी’ ने जवाब दिया– मैं विटामिन ‘डी’ हूँ। मैं सूर्य की किरणों में पाया जाता हूँ। हरी सब्जी में भी पाया जाता हूँ। मेरा काम अस्थियों के निर्माण में सहायता करना है तथा कैल्शियम के उपयोग को भी मैं बढ़ाता हूँ।
मेरी कमी से बच्चों में सूखा रोग तथा हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाती है। इस तरह मैं मानव के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हूँ।” फिर सब ने दोस्ती कर ली और मिलकर हँसते गाते आगे बढ़ते गए।

तभी एक बच्चे को गोद में लिए विटामिन ‘ई’ आता दिखाई दिया। उसे देखते ही सभी आपस में खुसर-पुसर करने लगे- क्या उससे दोस्ती किया जाए? फिर सबने सहमति जताई। सभी उससे पूछने लगे- कौन हो तुम? तुम्हारा क्या काम है?
यह सुनकर विटामिन ‘ई’ ने जवाब दिया– मैं विटामिन ‘ई’ हूँ। मैं मछली के तेल में, अंडे में, दालों में तथा दूध में पाया जाता हूँ। मेरा काम संतान उत्पन्न करने की शक्ति प्रदान करना है तथा त्वचा, बालों की देखभाल करने के साथ ही साथ बांझपन को भी दूर भगाता हूँ। इस तरह से मैं मानव के लिए महत्वपूर्ण हूँ।”
इतना कहकर वह चुप हो गया।
तभी दूर से दौड़ते दौड़ते विटामिन ‘के’ आया और कहा कि मुझे भी अपने साथ ले लो मैं भी बहुत जरूरी हूँ मानव के लिए।
तब विटामिन ‘ई’ ने पूछा कौन हो तुम? हमसे दोस्ती क्यों करना चाहते हो? इस पर विटामिन ‘के’ ने जवाब दिया– “मैं विटामिन ‘के’ हूँ।
मैं टमाटर, पालक, सोयाबीन तथा अंडे में पाया जाता हूँ। मेरा काम रक्त को बहने से रोकना है। मेरी कमी से रक्तस्राव होने लगता है।”
तब सभी ने आपस में दोस्ती कर ली और एक दूसरे के साथ मिलजुल कर घूमते रहे।

बीनू मिश्रा
भागलपुर

Spread the love

One thought on “विटामिन की कहानी विटामिन की हीं जुबानी-बीनू मिश्रा

Leave a Reply

%d bloggers like this: