गद्य गुँजन योगदूत 2026 सहरसा – Kumari Aruna

सहरसा – Kumari Aruna



आलेख -योग हमारे अमूल्य धरोहर।    जिंदगी  जीने का हमने जो सपना  देखा है उसे सरल व सुगम बनाने मे योग सहायक है । योग का शाब्दिक अर्थ मन से सांसो का, सांसो से शरीर का संतुलन  ही योग  है। मेरा मानना है कि एक सामाजिक  निर्माण कर्ता होने के नाते अपनी जिम्मेदारियों को निभाना भी योग  हीं तो है। यह एक शिक्षक को बच्चों को साथ लाने  का संयुक्त  योग है। हम अगर घर  या बाहर कार्य क्षेत्र में एक  दुसरे से जुड़ाव भी योग कहलाता है। जो ऊंच नीच,,जाति धर्म की वैमनस्य को त्याग कर समरूपता, एकात्मकता लाये वह हमारा योग  है। शारीरिक  या मानसिक  योग के द्वारा हम आर्थिक  योग को समृद्ध व विकसित कर सकते है।निष्काम भाव से किया गया प्रत्येक कर्म योग  है। योग से हमारे मानसिक तनाव दूर  होने के साथ साथ हमारी  सहनशक्ति  , कर्मठता तथा एकाग्रता को भी मजबूत  करता है। इस बदलाव भरे परिवेश  में रोग भगाने का सरल व सुगम एकमात्र  साधन योग ही है। यह हमारे जीवन का रक्षित मुनिगण  द्वारा  प्रदत्त वह अमूल्य धरोहर है जिसे जीवंत  रखना हमारा परम धर्म  होना चाहिए।  योग को अपने जीवन की कार्य शैली की अनिवार्यता समझ कर दैनिक चर्या मे अपनाना होगा। प्रकृति से जुडे  रहना  होगा ।हमारे पूर्वजों द्वारा  प्रदत्त  जीवन  शैली को अपनाना होगा। मन की शीतलता,शारीरिक पवित्रता तथा  सांसों की कार्य शीलता पर नियंत्रण  रखना होगा  तभी हम व। हमारा देश स्वच्छ, पवित्र  तथा स्वस्थ  रह  सकेगा और योग दिवस  की सार्थकता होगी। हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी के अथक परिश्रम का योग ही है कि  सम्पूर्ण  विश्व  ने योग   को संयोग  नही प्रयोग  कर उपयोग  , उपचार और उपभोग  कर 2014से विश्व योग दिवस  के रूप मे अनवरत अनवेषित हो रहा  है। आइए हम सब मिलकर  निष्काम भाव  से इस अमूल्य धरोहर  योग  को अपनाए  और सभी प्रकार  के रोग  को भगाए। ।।।।।

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