गद्य गुँजन नैतिक शिक्षा सबका सम्मान… रुचिका

सबका सम्मान… रुचिका



कक्षाएं चल रहीं थीं,शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहे थे ।सारे बच्चे बड़े ध्यान से शिक्षक की बात सुन रहें थें।तभी प्रिंसिपल सर एक बच्चे के साथ कक्षा में आएं।
शिक्षक ने कहा गुड मॉर्निंग बच्चों,कैसे हो?
बच्चे अपनी जगह पर खड़ा होकर बोलें ,गुड मॉर्निंग सर ,हम बहुत अच्छे हैं।
सर ने कहा,इससे मिलो यह है दीपक।यह आज से तुम्हारी कक्षा में ही पढ़ेगा। चूंकि इसका देर से नामांकन हुआ है तो तुम सब इसका पढ़ाई में सहयोग करोगे।
फिर दीपक को बोला,जाओ तुम जाकर बेंच पर बैठो।
दीपक जैसे ही बेंच की तरफ बढ़ा,सारे बच्चे दूसरे बेंच की तरफ इशारा करने लगें।
दीपक चुपचाप जाकर सबसे पीछे बेंच पर अकेले बैठ गया।
प्रिंसिपल सर सब चुपचाप देख रहें थें उन्होंने कक्षा के कुछ बच्चों को कार्यालय में आने को कहकर कक्षा से चले गए।
कार्यालय में शिक्षक ने छात्रों से पूछा तुमलोग दीपक को अपने पास क्यों नहीं बिठाया।सारे बच्चे चुप।
तभी एक बच्चे ने कहा दीपक के पापा शौचालय साफ करते हैं मैं उसके साथ नहीं बैठूंगा।फिर दूसरे ,तीसरे इस तरह सारे बच्चे यही बात कहने लगें।
प्रिंसिपल सर ने कहा तो क्या हुआ,अगर वह साफ करते हैं तो ।शौचालय की सफाई के बाद वह स्वयं भी तो हाथ पैर सब धोते हैं।
अगर वह शौचालय न साफ करें तो क्या विद्यालय के शौचालय में कोई जा पाएगा? क्या हम सबको परेशानी नही होगी?
जो काम दीपक के पापा करते हैं वह कोई दूसरा नही करता है तो इसका मतलब है कि वह सबसे कठिन काम करते हैं।फिर तो उन्हें ज्यादा सम्मान मिलना चाहिए ना।
और आप लोग जिसे ज्यादा सम्मान देना चाहिए उसको तिरस्कृत दृष्टि से सिर्फ इसलिए दिखते हैं क्योंकि वह ऐसा काम करते हैं।
यह तो बहुत गलत बात है।
कोई भी काम जो मेहनत ,लगन, ईमानदारी और सच्ची नियत से किया जाए वह कभी भी छोटा या हेय नही होता।
बच्चों को यह बात समझ आई और उन्होंने सर से माफी मांग कर दीपक के साथ या उसके जैसे लोगों के साथ अच्छे व्यवहार का वादा किया।

रूचिका
प्रधान शिक्षिका
राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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