आओ हम योग करें-अशोक कुमार - गद्य गुँजन

आओ हम योग करें-अशोक कुमार

Ashok

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आओ हम योग करें

          साथियों योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत धातु युज से हुई है जिसका मतलब व्यक्तिगत चेतना होता है। आज हमलोगों के बीच समय की प्रस्थिति ने ऐसे संकट में डाल दिया है कि लगभग सभी लोग रोगों से ग्रसित हैं। आधुनिक युग में नई-नई तकनीकी मशीनों के अविष्कार द्वारा मनुष्य के परिश्रम को कम कर उसे आलसी बना दिया है। यही नतीजा है कि आज लगभग हर एक व्यक्ति कुछ न कुछ रोगों से ग्रसित है। पहले हम लोग 10 किलोमीटर तक पैदल चला करते थे लेकिन अब आधुनिक तकनीकी द्वारा 2-4 किलोमीटर पैदल चलना दुश्वार हो गया है। जैसे-जैसे हमारे अंदर आलस्य बढ़ता गया वैसे-वैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती गई। हमें व्यक्तिगत चेतना के विकास के लिए नित्य सुबह जगकर कम से कम एक घंटा तक योग करना जरूरी है। योग के द्वारा हम स्वस्थ रह सकते हैं। योग द्वारा हमारे शरीर के अंदर जो जकड़न पैदा होता है वह दूर होता है तथा हमारा शरीर हृस्ट-पुष्ट एवं तंदुरुस्त रहता है। योग के माध्यम से हमें आत्मशांति के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान की भी प्राप्ति होती है। योग के माध्यम से हमें शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक गुणों का विकास होता है। योग के द्वारा हम विभिन्न रोगों जैसे मोटापा, डायबिटीज एवं शुगर को कंट्रोल कर सकते हैं। इससे हमें योग के साथ-साथ खेलकूद व्यायाम प्रतिदिन करनी चाहिए। हमें इसका एक रूटीन होना चाहिए ताकि हम प्रतिदिन उस रूटीन के हिसाब से योग कर सकें। योग का समय सुबह खाली पेट होता है। हम सुबह 2-4 किलोमीटर दौड़ भी सकते हैं। इससे हमारा ब्लड सरकुलेशन अच्छा रहेगा एवं हम स्वस्थ रहेंगे। हमें एक शिक्षक होने के नाते स्कूलों में भी चेतना सत्र में एवं अंतिम घंटी में बच्चों को खेल की घंटी निर्धारित कर उनका सर्वांगीण विकास कर सकते हैं। बच्चे खेल-खेल में शैक्षणिक, बौद्धिक, मानसिक एवं शारीरिक विकास कर सकते हैं। हमें विद्यालय के साथ-साथ अपने पोषक क्षेत्रों में भी बच्चों को खेल में रुचि लेने के लिए प्रेरित करना होगा। खेल ऐसा माध्यम है जिसमें बच्चे के सभी विकास संभव है। अगर बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर है तो वह बौद्धिक रूप से जरूर कमजोर होगा। इसलिए बच्चों को बौद्धिक, मानसिक एवं शारीरिक रूप में विकसित करने के लिए योग अति महत्वपूर्ण है। हम आधुनिक युग में इतना कमजोर हो गए हैं कि हमारी उम्र सीमा 100 वर्ष से घटकर 60-70 वर्ष पर आ चुकी है। यह सब हमारे आलस्य का परिणाम है। आज हमें जीने के लिए जिस तरह भोजन की जरूरत है उसी तरह योग की भी जरूरत है क्योंकि हम योग के बिना स्वास्थ्य नहीं रह सकते हैं। इसलिए हम अपने परिवार के साथ-साथ अपने समाज में सभी को योग करने के लिए प्रेरित करें एवं इसके बारे में जागरूक करें।

अशोक कुमार
न्यू प्राथमिक विद्यालय भटवलिया

नुआंव कैमूर

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