गद्य गुँजन आलेख अमेरिका, ईरान इजरायल युद्ध और गांधी की प्रासंगिकता : अरविंद कुमार

अमेरिका, ईरान इजरायल युद्ध और गांधी की प्रासंगिकता : अरविंद कुमार




आज जिस तरह अमेरिका, ईरान और इजरायल युद्ध मानवता की हत्या करने पर तुला है ,थोड़ी सी धैर्य रख ली जाती तो विश्व के न जाने कितने संसाधन और कितनी आबादी बच जाती । विश्व धधक रहा है ,जल रहा है ।हमारे संसाधन मिसाइल और बमों से जला दिए जा रहे हैं। यह मानवता की हत्या है और उस गांधी की याद दिलाता है जिसने अपनी शांति के तरीके से अपने भारत देश को आजाद करने का कार्य किया था।
एक तरफ हम पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं,बूंद बूंद पानी बचाने की बात करते हैं, ओड और इवन के आधार पर गाड़ियों का संचालन और कार पूल के तरीके से पेट्रोलियम पदार्थों की सुरक्षा और दूसरी तरफ बम और मिसाइल से ऊर्जा के महत्वपूर्ण संसाधनों को खत्म कर दिया जाना कहीं ना कहीं मानवता को बलि चढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।
शायद इस विश्व को दूसरे गांधी की जरूरत है ,जो अपने तरीके से इन सभी युद्ध में शामिल देशों को रोक कर विश्व को एक बड़ी विभीषिका से बचाने का कार्य कर सके। यह संयोग है कि हम भारत में जन्म लिए शायद हम ईरान और अमेरिका के निवासी भी हो सकते थे। भला यह सोचने वाली बात है जब भूकंप और कई तरह की प्राकृतिक महामारियां आती हैं, कोरोना फैलता है तो विश्व के देश एक दूसरे की मदद करते हैं ।मानवता को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं ,राशन और दूसरे तरह के संसाधन पहुंचा कर मानवता को बचाने का कार्य करते हैं तथा अपने मानव होने का एहसास दिलाते हैं। दूसरी तरफ इस क्रूरता से विनाश को न्योता देना ,मानवता को खत्म करना हम कैसे कह सकते हैं कि 21 वीं सदी के उत्तरार्ध की और बढ़ रहा यह मानव क्या यह राक्षसी और दानवी प्रवृत्तियां नहीं रुकेंगी ?तो विश्व इसी तरह समाप्त हो जाएगा, हमें संसाधनों के लाले पड़ जाएंगे तिल तिल कर करने को मानवता मजबूर हो जाएगा?
तो आइए गांधी के रास्ते पर चलकर विश्व के युद्ध को समाप्त कराने के लिए विभिन्न देशों के शासक प्रशासक और राष्ट्रध्यक्ष एक बैठक कर युद्ध को जल्द से जल्द खत्म कराने का साहस करें और बेवजह मानवता को खत्म करने का दुस्साहस रोक सके।

अरविंद कुमार

प्रधानाध्यापक, गौतम मध्य विद्यालय न्यू डीलिया, डेहरी,
रोहतास, 8825363264

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