अनोखा पक्षी नीलकंठ-सुरेश कुमार गौरव - गद्य गुँजन

अनोखा पक्षी नीलकंठ-सुरेश कुमार गौरव

Suresh

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अनोखा पक्षी नीलकंठ

          हम सभी पक्षियों के रंग-रुप और उसकी विशेषताओं के बारे में अक्सर पढ़ते व जानते हैं। लेकिन आज दक्षिण एशियाई पक्षी नीलकंठ के बारे में कुछ जानकारियों से अवगत होते हैं।

नीलकंठ नामक पक्षी भारत में पाया जानेवाले पक्षियों की रोलर प्रजाति से संबंध रखता है लेकिन अन्य रोलर पक्षियों से रंग में यह कुछ भिन्न होता है।

नीलकंठ पक्षी दक्षिणी एशिया में पाया जाता है। भारत, इंडोनेशिया, इराक इत्यादि देशों में भी यह पाया जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप में नीलकंठ पर्वतीय क्षेत्रों में भी निवास करता है। यह प्रवासी पक्षी नहीं है लेकिन मौसम के मुताबिक अपनी जगह बदल लेते हैं।

नीलकंठ पक्षी का रंग नीला होता है। इस पक्षी का गला हल्के भूरे रंग का होता है और दिखने में खूबसूरत भी लगता है।

इसकी आवाज कौवे जैसी कठोर और कर्कश होती है। इसकी चोंच काले रंग की होती है। नीले रंग के कारण इसकी पहचान अनोखी हो जाती है।

यह पक्षी करीब 27 cm लम्बा होता है। नीलकंठ का वजन मात्र 80 से 100 ग्राम होता है। नर और मादा नीलकंठ पक्षी दिखने में लगभग एक जैसे ही होते हैं। विशेषज्ञ ही नर मादा के बारे में बता सकते हैं।

इस पक्षी को इंडियन रोलर कहते हैं क्योंकि नीलकंठ उड़ते वक्त एरोबिक्स मूव्स करता है और 360 डिग्री घूमता भी है। इस पक्षी की एक विशेषता यह भी है कि यह हवा में कई आकर्षक करतब करता है जो आकर्षित करता है।

नीलकंठ पक्षी का प्रजनन समय भारत में मई से जून के बीच होता है। यह गर्मियों का मौसम है जिसमें नर और मादा नीलकंठ पक्षी एक दूसरे से मिलन समागम करते है।

यह पक्षी आमतौर पर जंगलों के समीप घास के मैदानों में दिख जाते हैं। इनका निवास स्थान पेड़ है। इसके अलावे ऊंचे खंभे व बिजली के एकल तार पर भी देखें जा सकते हैं।

इस पक्षी का मुख्य भोजन बीज, कीड़े, मकोड़े होते है। ये जमीन पर रेंगने वाले छोटे सरीसृप, बिच्छुओं को भी खाते हैं। हवा में ही यह कीट पतंगों को खाने के लिए अपना शिकार बनाते हैं।

यह पक्षी किसान प्रेमी भी होता है। खेतों में पाए जाने वाले कीड़ों को खाकर फसलों को नष्ट होने से बचाता है। ये अक्सर खेतों में दिखाई देते हैं।

नीलकंठ पक्षी मादा को आकर्षित करने के लिए हवा में गोते लगाता है। इस समय इसके पँखो का नीला रंग बहुत खूबसूरत लगता है।

यह पक्षी घोंसला बनाकर रहता है। वृक्षों के तने पर बने कोटर में नीलकंठ पक्षी घोंसला बनाता है। कभी-कभी यह कठफोड़वा के बनाये कोटर में भी घोंसला बना लेते है। यह घोंसला लकड़ी के तिनकों और पत्तियों से बनाता है। जिसकी कारीगरी अच्छी दिखती प्रतीत होती है।

मादा नीलकंठ पक्षी सफेद रंग के गोलाकार 3 से 4 अंडे देती है। अंडों को सेहने का कार्य नर और मादा दोनों करते है। 20 दिन तक सेहने के बाद अंडों से बच्चे निकलते है। 2 महीने नर-मादा की परवरिश के बाद बच्चा घोंसला छोड़ देता है।

ऐसी मान्यता है कि इस पक्षी को भगवान शिव की तरह ही नीलकंठ कहा जाता है। दशहरा में इस पक्षी का दिखना शुभ माना जाता है। कहते हैं इस पक्षी के इस समय दर्शन हो जाये तो यह शुभकारी हो जाता है।

यह पक्षी भारत के कुछ राज्यों कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा व आसपास में पाए जाते हैं।

इस पक्षी की आबादी अब तेजी से घट रही है। इसका कारण इन पक्षियों का सड़क किनारों पर रहना, खेतों में कीटनाशकों के प्रयोग से और शिकार करने से भी ये पक्षी मर रहे हैं। वैसे नीलकंठ पक्षी का औसत जीवनकाल 15 से 18 वर्ष माना जाता है।

इसके अलावे आप कुछ और जानकारियां साझा करना चाहते हैं तो कर सकते हैं।

सुरेश कुमार गौरव (शिक्षक)

पटना (बिहार)
स्वरचित व मौलिक

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