स्तनपान का महत्व-सुधीर कुमार - गद्य गुँजन

स्तनपान का महत्व-सुधीर कुमार

Sudhir

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स्तनपान का महत्व

          रश्मि आज अस्पताल में भर्ती हैं। उसका डिलीवरी होने वाला है। उसके सास-ससुर भी वहीं है तथा उसकी देखभाल में लगे हुए हैं। वह भी बहुत खुश दिख रही है।

रश्मि बहुत ही सुंदर लड़की है जो उसे देखता है देखते ही रह जाता है। पढ़ी-लिखी और आधुनिक विचारों वाली! रोज शाम को सभी सहेलियों के साथ किट्टी पार्टी मनाने और फैशन मे मस्त रहने वाली सुंदर तितली! उसका एक अलग ही संसार है। खैर डिलीवरी हुआ और वह अपने बच्चे के साथ घर आ गयी। आते वक्त उसने डाक्टर के द्वारा लिखी गई दवाईयां और अपने मन से दूध का एक डिब्बा तथा उसे पिलाने की एक बोतल भी लेते आई।

घर में दवाईयां देते समय पति सोमेश की नजर उस बोतल पर पड़ गई। उसने उसे दिखाते हुए पूछा, “यह क्यों लाई हो अपने साथ?”

“दूध पिलाने के लिए। मैं इसे अपना दूध नहीं पिलाऊंगी। “रश्मि का सीधा सा उत्तर था।

“क्यों? इसमें क्या परेशानी है?” सोमेश ने आश्चर्य से पूछा।

“दूध पिलाने से फिगर खराब हो जाता है और वह सुंदर नहीं रह जाती है। “रश्मि ने कारण बताया।

सुनकर सोमेश चकित रह गया; बोला, “किसने कहा तुम्हें कि दूध पिलाने से लड़कियां सुंदर नहीं रह जाती है। पगली यह तो ईश्वर का वरदान है जो किसी-किसी को ही मिल पाता है। हर लड़की चाहती है कि वह मां बने और अपने बच्चे को अपना ही दूध पिलाये और एक तुम हो कि विधाता के इस वरदान को बेकार करना चाहती हो। अभागी कहीं की।”

रश्मि ने कुछ कहना चाहा पर चुप रह गई। कुछ देर बाद सोमेश ने देखा कि रश्मि बच्चे को अपना दूध पिला रही है।

सुधीर कुमार

किशनगंज बिहार

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