15 अगस्त की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थी,कोई बच्चा भाषण याद कर रहा था तो कोई गाना।कोई संगीत की धुन पर थिरक रहा था।कल 15 अगस्त है शिक्षक भी काफी व्यस्त दिख रहें थें।कल होने वाले कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने में सभी लगे हुए थे।कुछ बच्चे रंगीन तिरंगे कागज को काटकर सजा रहे थें।
सफाईकर्मी के सफाई करने के बावजूद बच्चे विद्यालय परिसर को चमकाने में लगे हुए थें।उनका जोश देखते ही बनता था।
कुछ बच्चे टीम लीडर बनकर सारे कार्य करवा रहें थें तो कुछ कर रहें थें।
मगर विद्यालय के बाहर एक कोने में एक लड़का चुपचाप खड़े होकर सब कुछ ललचाई नजरों से देख रहा था।तभी एक शिक्षक की नजर उस पर पड़ी और उन्होंने उसे आवाज दी।वह लड़का घबड़ा गया।फिर शिक्षक ने उसे प्यार से बुलाया।
तुम्हारा नाम क्या है?
बच्चे ने कहा-मोहन।
तुम वहाँ बाहर क्यों खड़े हो शिक्षक ने पूछा।
मैं यहाँ नही पढ़ता हूँ।
फिर तुम कहाँ पढ़ते हो,अपने विद्यालय में क्यों नहीं गए?
बच्चे ने कहा-मैं कहीं नहीं पढ़ता।
,शिक्षक ने कहा-मगर ऐसा क्यों
बच्चे ने कहा-मेरे पापा के पास किताब खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।
शिक्षक ने कहा-तुम यहाँ पढ़ने आओ,तुम्हें किताब कॉपी सब मिलेगा।साथ ही दोपहर में खाना भी मिलेगा।
बच्चे को आश्चर्य हुआ -सच में
शिक्षक ने कहा-हाँ सच में।
बच्चे का चेहरा खुशी से खिल उठा।
पन्द्रह अगस्त के दिन वह बच्चा सबसे आगे कतार में खड़ा होकर बोल रहा था-भारत माता की जय
वास्तव में आजादी का सही मायने में अर्थ यही है कि हर होठों पर मुस्कान बनी रहे।
कुछ इस तरह 80वीं वर्षगाँठ जोश उत्साह और हर्ष के साथ मनाई गयीं।
रूचिका
प्रधान शिक्षक
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार