गद्य गुँजन दिवस विशेष,देशभक्ति हिरावल लड़ाकू संगठन : अरविंद

हिरावल लड़ाकू संगठन : अरविंद



खजुरी बिलनियां धार अब सिर्फ नाम की ही रह गई है। अररिया जिले के भरगामा प्रखंड के पश्चिमी भू-भाग में स्थित इस धार का उद्गम कोसी कछार से हुआ था।

​कहा जाता है कि जब इसका जलस्तर घटता था, तो बेहद उपजाऊ दियारा भूमि बाहर निकल आती थी। तेज जलधारा के कारण खेतों की सीमाएं (मेढ़ें) मिट जाया करती थीं।

इसके बाद फसलों के लिए स्वर्णिम यह मिट्टी किसानों को मालामाल कर देती थी; जूट, मक्के और धान की बालियाँ लहलहा उठती थीं।

​इसी क्षेत्र में एक छोटा सा गाँव है—खजूरी गांधीनगर, जो ब्रिटिश हुकूमत के समय इस इलाके के क्रांतिकारियों का सबसे बड़ा गढ़ हुआ करता था।

​यहाँ के क्रांतिकारियों के अगुआ थे महंत दास जी, जिन्होंने भरगामा-खजुरी में ‘हिरावल लड़ाकू संगठन’ का गठन किया था। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इस हिरावल संगठन ने गोरी पलटनों के नाकों चने चबवा दिए थे।

​कहा जाता है कि कई बार खजुरी में हिरावल संगठन और अंग्रेजी पलटन का आमना-सामना भी हुआ, मगर गोरे इनका कुछ बिगाड़ न सके।

इस संगठन में सुकैला मोड़ के सरयुग पासवान मुखबिरी (गुप्तचर) का काम करते थे।

कहते है ​हिरावल संगठन की बढ़ती ताकत से बौखलाई अंग्रेजी हुकूमत ने क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए खजुरी गाँव को चारों तरफ से घेर लिया।

चारों तरफ पुलिस ही पुलिस दिखाई देने लगी—हर तरफ लूट-खसोट और तबाही का मंज़र था।

बच्चों और महिलाओं की चीत्कार गूँज उठी और लोग घर छोड़कर जंगलों की ओर भागने लगे।

​बाद में क्रांतिकारी टीम के कमांडर अनुराग दास, राघव दास, तनुक लाल यादव, भूपलाल गोप, कमलधारी राय, योगानंद ऋषि और नथुनी सिंह सहित दर्जनों क्रांतिकारियों को अंग्रेजी पुलिस ने गिरफ्तार कर अररिया जेल में बंद कर दिया।

फिर भी किसी का मनोबल नहीं टूटा; वे जेल की सलाखों के पीछे से भी आजादी के तराने गाते रहे—“मेरा रंग दे बसंती चोला…”

​भरगामा के रणबांकुरे परिमल दास, मोहित लाल यादव और ब्रह्मदेव सिंह ने पटना सचिवालय पर लहरा रहे गुलामी के प्रतीक ‘यूनियन जैक’ को हटाकर वहाँ तिरंगा फहराने का अदम्य साहस किया था।
इस ‘जुर्म’ में वे गिरफ्तार भी हुए।

​एक बार मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में क्रांतिकारी राघव जी ने निर्भीक होकर कहा था— “माय लॉर्ड! डरा हुआ प्रशासन ही दूसरों का चैन छीनता है।”

​भरगामा की माटी से ढेरों ऐसे महान क्रांतिकारी निकले हैं, जिनके त्याग और बलिदान के बारे में पूरी तरह लिख पाना मेरे जैसे साधारण व्यक्ति के बस की बात नहीं।

​अपनी कलम के माध्यम से, मैं उन तमाम अमर क्रांतिकारियों के चरणों में अश्रुपूर्ण श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।

​जय हिंद, जय भारत!

अरविंद कुमार ,भरगामा, अररिया की कलम से🖍️

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