गद्य गुँजन Uncategorized कवि सत्यनारायण जी… ज्योत्सना वर्धन

कवि सत्यनारायण जी… ज्योत्सना वर्धन

कवि सत्यनारायण जी : एक युग का अंतबिहार के सांस्कृतिक के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। 27 अगस्त 2026 को पटना के कदमकुआँ की एक छोटी सी गली में, जहाँ वर्षों तक कलम की खट-खट गूंजती रही, वहाँ सन्नाटा पसर गया है। 92 वर्ष की उम्र में कवि सत्यनारायण जी ने अंतिम सांस ली।मैं जब भी “मेरे भारत के कंठहार, तुझको शत-शत वंदन बिहार” सुनती हूँ, तो मन बहुत शांत हो जाता है। और बिहार गीत केवल.गीत नहीं बिहार की गाथा सुनाता है। ये सिर्फ गीत नहीं, बिहार की आत्मा है। और इस आत्मा को शब्द देने वाले थे – भोजपुर के कोलडिहरी गाँव में 13 सितंबर 1935 को जन्मे एक साधारण से बालक (सत्यनारायण जी)।एक साधारण जीवन, असाधारण रचना – पटना कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर करने के बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की, 1993 में सेवानिवृत्त हुए, लेकिन अपनी लेखनी को उन्होंने कभी विराम नहीं दिया। 1974 में जब पूरा बिहार जेपी आंदोलन की आग में जल रहा था, तो सत्यनारायण जी लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ गाँव-गाँव घूमकर जन-जागरण कर रहे थे। उनकी कविताएं तब नारे बन जाती थी।2012 का वो दिन था जिसे हम.और आप बिहार वासी कभी नहीं भूल सकते हैं, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने सत्यनारायण जी की रचना को बिहार का राजकीय गीत घोषित किया। एक कवि के लिए इससे बड़ा सम्मान क्या होगा कि उसकी पंक्तियाँ हर सरकारी समारोह में, हर स्कूल में गाई जाएं।सत्यनारायण जी सिर्फ राज्यगीत तक ही नहीं रुके बल्कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय का कुलगीत जिसके बोल “तुम न नहीं कर सकते” भी उनकी ही लेखनी है। उनकी कृतियों के लिए उन्हें नागार्जुन सम्मान, भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार से भी नवाजा गया है। इतने ज्ञानी अनुभवी होने का प्रदर्शन उन्होंने कभी नहीं किया। नि:स्वार्थ भाव से वे अपना काम करते ही चले गए। उनका स्वभाव सरल और सहज था।मेरी स्मृति मेंमैं उनसे कभी मिली तो नहीं हूं लेकिन उनकी कृतियों को पढकर उन्हें जानने का मौका मिला है। अखबार के माध्यम से तता चला मुझे की कदमकुआँ वाले घर पर उनके छोटे से घर में किताबों का अंबार था वह आज भी है। जहां एक बार वह अपने बेटे से बोले – “बेटा, बिहार गरीब नहीं है, बिहार को गरीब बताया गया है। हमारे पास बुद्ध हैं, महावीर हैं, आर्यभट्ट हैं, चाणक्य हैं।” उनकी आँखों में बिहार के लिए गर्व का भाव था।आज वे चले गए, पर उनकी पंक्तियाँ उनके साथ सदा के लिए अमर हो गईं हैं- “भारत के कंठहार, तुझको शत-शत वंदन बिहार”, जब तक बिहार रहेगा, जब तक यह बिहार गीत बिहार राज्य में न केवल गाया जाएगा बल्कि इस गीत के माध्यम से कवि सत्यनारायण जी को हमेशा याद किया जाएगा। आप को मेरा वंदन है प्रणाम है। मेरी ओर से आपको विनम्र श्रद्धांजलि।

मध्य विद्यालय पहाड़ चक मोतीपुर मुजफ्फरपुर बिहार

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