बिहार गाथा-अनुज वर्मा - गद्य गुँजन

बिहार गाथा-अनुज वर्मा

Anuj

बिहार गाथा

                  सर्व प्रथम बिहार के लोगों को स्वतंत्र गौरवशाली स्वर्णिम बिहार प्रांत के लिए तन मन और धन न्यौछावर करने वाले अग्रिम पंक्ति के शहीद बाबू वीर कुँवर सिंह और प्रणेता डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा को शत-शत नमन करता हूँ। मैं नमन करता हूँ उस क्षण को जब हमारा राज्य बिहार 22 मार्च 1912 को बंगाल प्रेसिडेन्सी से पृथक होकर स्वतंत्र राज्य बना। मैं बिहार के उस गौरवशाली स्वर्णिम अवसर एवं उस अवसर के लिए कार्य करने वाले सभी को सादर नमन करता हूँ।

मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मैं उस बिहार का निवासी हूँ जिसके गर्भ में ऐतिहासिक विरासत छिपा हुआ है। प्राचीन काल से हीं बिहार ज्ञान, दान और धर्म की पवित्र भूमि रही है। जब ज्ञान की बातें करें तो नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय विश्व प्रसिद्ध थे। विक्रमशिला में तंत्र-मंत्र की भी शिक्षा दी जाती थी। विश्व के महान गणितज्ञ आर्यभट्ट बिहार के हीं थे जिन्होंने शून्य का खोज किया। गौतमबुद्ध और महावीर स्वामी ने बिहार के लोगों को ज्ञान प्रदान किये हैं।

दान की बात करें तो कर्ण जैेसा दानी जिन्होंने अपना कवच कुंडल विष्णु को दान दे दिये। धर्म की बात करें तो बिहार में अनेक धर्म को मानने वाले लोग एक साथ मिल-जुलकर रहते हैं, ऐसा है अपना बिहार। प्राचीन काल में यह देश की संस्कृति और धर्म का मुख्य केंद्र बिंदु रहा है। यह सिक्ख धर्म के अंतिम और दसवें गुरु गुरू गोविंद सिंह जी की जन्म स्थली है। यहाँ का मंदार पर्वत देवता और दानवों के बीच समुद्र मंथन का साक्ष्य प्रस्तुत करता है। बिहार अंग साम्राज्य, प्रतापी जरासंध, बिम्बिसार, अजातशत्रु, चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक महान और प्रतापी गुप्त वंश के मगध साम्राज्य प्रसिद्ध हैं। वैशाली विश्व के पहले गणतंत्र का साक्षी रहा है। बिहार भगवान महावीर और गुरु गोविन्द सिंह जी की जन्मभूमि, बुद्ध की कर्मभूमि और गुरु चाणक्य की जन्म तथा कर्मभूमि रहा है। मध्यकाल में बिहार हज़रत शाह कमालुद्दीन यह्या मनेरी, हज़रत मख़दूम शेख़ शरीफुद्दीन, हज़रत मख़दूम सैयद शाह अलाउद्दीन बुखारी और बाबा आशिक शाह जैसे विख्यात सूफी संतों की कर्मभूमि रहा।

बिहार में देखने, समझने, महसूस करने और संजोकर रखने लायक भी बहुत कुछ है। बुद्ध की ज्ञान-स्थली बोधगया का बोधिवृक्ष, बोधि मंदिर और प्राचीन अवशेष, गया के फल्गु नदी के तट पर पितरों की मोक्ष-स्थली, राजगीर के मगध साम्राज्य और विश्व के सबसे पहले गणतंत्र वैशाली। नंदनगढ़ लौरिया तथा केसरिया के बौद्ध स्तूप, भागलपुर का प्राचीन विक्रमशिला बौद्ध विश्वविद्यालय, पटना के कुम्हरार और अगमकुआं मौर्यकाल के अवशेष, सासाराम का शेरशाह का मक़बरा, पटना का पुरातात्विक संग्रहालय एवं तख़्त हरमंदिर साहिब, सीतामढ़ी के पुनौरा में सीता की जन्मस्थली एवं जानकी कुंड, बाल्मीकि नगर का खूबसूरत जंगल और टाइगर रिज़र्व, दुनिया का सबसे बड़ा पशुमेला सोनपुर, नवादा का सुप्रसिद्ध ककोलत जलप्रपात, मुंगेर के हवेली खड़गपुर की सुंदर झील और भीमबांध के गर्म जल के प्राकृतिक कुंड बिहार के अनमोल धरोहर हैं।

बिहार राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी जी की सत्य अहिंसा की प्रयोगभूमि है। यह लोकनायक जयप्रकाश नारायण की कर्म भूमि है। बिहार की पावन धरती का लाल डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भारत का प्रथम राष्ट्रपति बना। उनके ज्ञान की डंका संपूर्ण भारत में गूंजा था।
आज भी बिहार और बिहारी भारत ही नहीं विश्व के हर देश में ज्ञान और कर्म से जाने जाते हैं।
यहाँ का मुख्य और पवित्र पर्व छठ लोक आस्था का अदभूत पर्व है। यहाँ के लोगों का मुख्य भोजन लिट्टी चोखा, साग, भूजा, दही चूड़ा, भात, रोटी, सत्तू इत्यादि है।

वर्तमान में बिहार प्रगति की उड़ान भर रहा है। बिहार में जगह-जगह पर्यटन स्थल बन रहे हैं। कटिहार में गोगाबिल झील को भी सजाया सँवारा जा रहा है। एक बार फिर यह शिक्षा का केन्द्र बिंदु बनने की ओर अग्रसर है। सभी ओर विकास तेजी से हो रहा है। लोगोँ के रहन-सहन में बहुत बदलाव हुआ है। आज हम सभी गर्व से कह सकते हैं कि हम बिहारी हैं।

अतः हम सभी अपने बिहार के अतीत और वर्तमान धरोहर को संजोकर रखने का एवं सुन्दर और स्वच्छ बिहार बनाने का मिलकर शपथ लें।
क्योंकि ———
बिहार है हम सबका शान,
बढ़ाएंगे मिलकर इसका मान।
करेंगे सदैव सबका सम्मान,
बस इतनी सी है अनुज का अरमान।

अनुज वर्मा
मध्य विद्यालय बेलवा कटिहार
बिहार

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