Category: संदेशपरक

विषय में या विषय के प्रति रुचि व जिज्ञासा जगाना शिक्षक की कला : गिरीन्द्र मोहन झाविषय में या विषय के प्रति रुचि व जिज्ञासा जगाना शिक्षक की कला : गिरीन्द्र मोहन झा

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शिक्षक के तीन ही प्रमुख गुण होते हैं।- विषय का गंभीर ज्ञान (content knowledge), सम्प्रेषण कौशल(communication skill) और शिक्षण-शास्त्र(Pedagogy)। कहते[...]

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बचपन और उसकी यादें : रूचिकाबचपन और उसकी यादें : रूचिका

0 Comments 11:53 am

बचपन और उसकी यादें जब भी जेहन में आ जाती हैं तो होठों पर बरबस ही मुस्कान चली आती हैं।बचपन[...]

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पटना का गोलघर-एक ऐतिहासिक स्मारक : हर्ष नारायण दासपटना का गोलघर-एक ऐतिहासिक स्मारक : हर्ष नारायण दास

0 Comments 11:50 am

पटना विश्व के प्राचीनतम नगरों में से एक है।अपनी ऐतिहासिक गाथा के क्रम में इस नगर के नाम कई बार[...]

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अंग्रेजी शिक्षा का खालीपन : डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्याअंग्रेजी शिक्षा का खालीपन : डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्या

0 Comments 10:21 am

सुरेश बहुत खुश था। पिता बनने के सुख की अनुभूति से आह्लादित वो फुले नहीं समा रहा था। बार-बार भगवान[...]

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एक बेटी की उड़ान : सुरेश कुमार गौरवएक बेटी की उड़ान : सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 8:51 pm

गौरी को जब पहली बार आसमान में उड़ते हवाई जहाज़ को देखने का मौका मिला, वह बस चुपचाप उसे देखती[...]

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मैं भी तो बेटी हूं : डॉ. स्नेहलता द्विवेदी आर्यामैं भी तो बेटी हूं : डॉ. स्नेहलता द्विवेदी आर्या

0 Comments 9:00 pm

सलमा धीरे धीरे आकर मेरे बगल में झिझकते और शर्माती हुई ख़डी हो गई। पहले तो मैंने उसे तवज्जो नहीं[...]

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lovely kumari

सुनीता का त्याग : लवली कुमारीसुनीता का त्याग : लवली कुमारी

0 Comments 9:45 pm

खट-खट की आवाज सुन कर सुनीता ने कहा, “नैना देखो तो दरवाजा पर कोई आया है।” “मां, पार्सल वाले भैया[...]

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असफलता से सफलता तक- सुरेश कुमार गौरवअसफलता से सफलता तक- सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 6:35 pm

रवि एक मेहनती लेकिन साधारण छात्र था। माध्यमिक की परीक्षा में असफल होने के बाद उसकी दुनिया जैसे अंधकारमय हो[...]

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परीक्षा का सच- सुरेश कुमार गौरवपरीक्षा का सच- सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 6:31 pm

गाँव के छोटे से स्कूल में पढ़ने वाला सूरज पढ़ाई में औसत था। परीक्षा का नाम सुनते ही उसके माथे[...]

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तेते पाँव पसारिए- मनु कुमारीतेते पाँव पसारिए- मनु कुमारी

0 Comments 7:59 am

मनुष्य को अपने सामर्थ्य के अनुसार हीं जीवन में खर्च करना चाहिए। ऐसा नहीं कि आमदनी अठन्नी हो और हम[...]

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