गरीब किसान की खुद्दारी-लवली कुमारी - गद्य गुँजन

गरीब किसान की खुद्दारी-लवली कुमारी

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गरीब किसान की खुद्दारी

          सड़क पर काफी भीड़ थी। कुछ लोग मारो और मारो का शोर मचा रहे थे। जब उस भीड़ के नजदीक गई तो देखा कि एक बूढ़े व्यक्ति को कुछ लोग बुरी तरह पीट रहे थे और उस व्यक्ति की अब कराहने की आवाज भी बंद होने लगी थी। फिर मैंने किसी तरह उन सबों को शांत करवाया और उनसे पूछा क्यों मार रहे हो आप सभी इनको? उनलोगों ने कहा यह व्यक्ति चोरी करके भाग रहा था। कल भी इसने चोरी की थी। आज पकड़ा गया है तो रो रहा है। मैने कहा रुकिए, इनकी कराहने की आवाज सुनिए ये कमला-कमला कह रहे हैं। थोड़ा पानी पीने दीजिए इन्हे। भीड़ में से एक व्यक्ति ने कहा कमाल है मैडम, एक तो इसने चोरी की और इन्हे पानी पिलाऊं। फिर मैंने उन्हें पानी पिलाया और पूछा कि ये कमला कौन है? उस बूढ़े व्यक्ति ने कहा कमला मेरी पत्नी है जो बहुत बीमार है। उसी की दवाई के लिए मैंने पैसे चोरी की थी। सबसे पैसे मांगे पर किसी ने मेरी मदद नहीं की। हारकर न चाहते हुए भी मुझे चोरी करनी पड़ी।कल मैं इसी मंदिर से पैसे चोरी किया था और आज इसी मंदिर में अपनी पत्नी के चांदी के पायल रखने आया था। इन लोगों ने सोचा कि मैं पायल चुरा कर ले जा रहा हूं।

उस बूढ़े व्यक्ति के घर जाकर देखा तो सचमुच उसकी पत्नी बिछावन पर बीमार परी थी। अपने पति को देखते ही पूछ बैठी आपने उस पैसे के बदले पायल रख दिया ना? भगवान से क्षमा मांग लिए ना? इस दृश्य को देखकर मेरी ही नहीं वरन सबों की आंखें छलछला गई। सभी ने मिलकर उनकी मदद की और सबों की आंखों में उनके लिए पछतावा सम्मान और आदर भी था।

शिक्षा- इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि हमें हालात को देखते हुए स्थिति का सम्मान करना चाहिए।

लवली कुमारी
उत्क्रमित मध्य विद्यालय अनूप नगर

बारसोई कटिहार

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