जंगल में आग-अशोक कुमार - गद्य गुँजन

जंगल में आग-अशोक कुमार

जंगल मे आग

एक समय की बात है। जंगल में सभी जानवर अमन चैन से रह रहे थे। सुबह का समय था खरहा ने देखा कि जंगल में धुआँ उठ रहा है। उसने सोचा कि जंगल में आग लग चुकी है। वह भागने लगा भागते-भागते उसे लोमड़ी से मुलाकात हुइ। लोमड़ी  ने पूछा कि तुम क्यों भाग रहे हो? खरहे ने कहा कि जंगल में आग लग चुकी है तुम भी भागो। लोमड़ी  भी भागने लगी। दोनों भागने लगे तभी उनकी मुलाकात हाथी से हुई। उसने पूछा तुम दोनों क्यों भाग रहे हो? दोनों ने बताया कि हाथी भैया जंगल में आग लग गई है, भागो तुम भी भागो। हाथी भी भागने लगा। यह बात पूरे जंगल में फैल चुकी थी कि जंगल में आग लग गई है। सभी जानवर भागने लगे। इसी बीच सबकी मुलाकात शेर से हुई। शेर ने पूछा कि तुमलोग जंगल से क्यों भाग रहे हो? सभी जानवरों ने एक स्वर में कहा कि जंगल में आग लग गई है इसलिए हमसब भाग रहे हैं। महाराज आप भी भागिए। शेर ने पूछा कि यह समाचार तुमलोगों को किसने बताया। खरहा ने कहा कि महाराज मैंने अपनी आँखों से देखा कि जंगल में धुआँ उठ रहा था। मैं भागने लगा जिसे देख सभी जानवर भागने लगे। शेर ने कहा चलो सच्चाई का पता लगाते हैं। सभी जानवर शेर के पीछे-पीछे चल पड़े।जब सभी जानवर धुएँ वाले स्थान पर पहुँचे तो देखा कि एक बहेलिया मधुमक्खी का छाता उतारने के लिए धुआँ किया था ताकि धुएँ  से मधुमक्खियाँ भाग जाऐगी और वह आसानी से छाता से मधु उतार लेगा। उसी धुएँ को देखकर खरहे ने समझा कि जंगल मे आग लगी हुई है। शेर ने कहा कि बिना सच्चाई जाने बगैर अफवाहों से बचना चाहिए। सभी जानवरों के चेहरे पर खुशियाँ छा गई। सभी मिल-जुलकर रहने लगे।

अशोक कुमार
न्यू प्राथमिक विद्यालय भटवलिया
नुआव कैमूर

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