झिझक-कुमारी निरुपमा - गद्य गुँजन

झिझक-कुमारी निरुपमा

Nirupama

Nirupama

झिझक

          सोनम आज बहुत अच्छी तरह से वर्ड को याद किया। गत दिन जब मनोरमा मैडम कल्पना चावला के बारे में पढ़ाया तभी से उसके मन में कल्पना चावला के जैसा बनने की इच्छा बलवती हो गई। वह अन्य दिन भी वर्ड मिनिंग पढ़कर जाती थी लेकिन झिझक के कारण बता नहीं पाती थी परन्तु आज उसने निश्चय कर लिया था कि वह हर हाल में सुनाएगी।

मनोरमा मैडम आज वर्ग में सबसे सुना पर उसे यह कहकर खड़ा कर दिया कि तुम तो सुनाओगी नहीं। सोनम बहुत बार कहना चाही कि मैडम मुझे भी सुनाना है परन्तु संकोचवश नहीं कह सकी। आज उसे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था। उसकी सहेलियों ने मैडम को बताया कि वह कल्पना चावला बनना चाहती हैं। उसके आंखों में आसूं आ गये। वह घर आकर माॅं को सब कुछ बताया।

सोनम : माॅं, मैं अपनी झिझक कैसे दूर करूं। मैं भी कल्पना चावला के जैसा बनना चाहती हूॅं। सबने कहा मैम को पर मैं नहीं कह सकी।
माॅं : हाॅं, बहुत आसान है। तुम अगले दिन जब वर्ग में जाना तब यह सोचना कि मैं कल्पना चावला हूॅं। मुझे भी वह सब करना है जो उसने किया।

अगले दिन सोनम बहुत विश्वास पूर्वक स्वंय खड़ी होकर मैडम के प्रश्नों का जबाव दिया। आज तो मनोरमा मैडम काफी खुश थी। उन्होने ज्योंहि उसके हौसला आफजाई के लिए कहना चाहा, देखो यह भी कल्पना चावला के जैसा……
सोनम ने तुरंत कहा – I am Kalpana Chawla.
पूरा वर्ग तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कुमारी निरुपमा

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