मनुष्य अपना भाग्य निर्माता स्वयं है-रीना कुमारी - गद्य गुँजन

मनुष्य अपना भाग्य निर्माता स्वयं है-रीना कुमारी

मनुष्य अपना भाग्य निर्माता स्वयं है

          जैसा कि हम अपने समाज में देखते है कि बहुत से लोग भाग्य के भरोसे बैठे रहते हैं।
उनका कहना होता है कि जब भाग्य में लिखा है तो वो हमें प्राप्त होगी ही। इसके लिए हमें कार्य करना जरुरी नही और वे मेहनत करना छोड़ कर भाग्य भरोसे बैठ जाते हैं। क्या ये सही है? तो मेरा उत्तर होगा नहीं। जैसा कि हम लोग जानते है कि भाग्य भी उन्हीं का साथ देता है जो अपने कर्म पथ पर निरन्तर चलकर मंजिल को प्राप्त करने में अपना आत्म विश्वाश बनाए रखते हैं। अपने कर्म पथ पर अडिग रहते हैं।

जैसा कि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में उपदेश दिये हैं कि कर्म ही पूजा है। हमें निःस्वार्थ रूप से लक्ष्य प्राप्त हेतु कार्य करते रहना चाहिए।फल की चिन्ता नहीं करनी चहिए। कर्म करने वाले को फल की प्राप्ति निश्चित हाती है। आये दिन हम अपने समाज में देखते हैं कि कुछ लोगों की आँखो में उदासी का सैलाब उमड़ता दिखता है ऐसा इसलिए कि वे कर्म करना छोड़कर भाग्य भरोसे बैठ जाते हैं। एसे में वे प्रगति की सीढ़ी पर कैसे चढ़ सकते हैं? सवाल ही नहीं उठता। अतः हमें हमेशा कर्म का निर्वाहन करना चाहिए।

मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं होता है।जो व्यक्ति भाग्य के भरोसे बैठा रहता है उनका भाग्य भी बैठा रहता है। जो हिम्मत बाँधकर अपनी इच्छा शक्ति को मजबुत कर मन में विश्वाश जगाकर खड़ा हो अपने लक्ष्य पाने को आतुर रहते है उसका भाग्य भी खड़ा हो जाता है।

भाग्य बना हुआ नहीं मिलता है अपनी संघर्ष से उसका निर्माण करना है। इसलिए हम उसके निर्माता स्वयं हैं।

जीवन में सफलता का एक ही राज है कि हम मेहनत करें तभी सफलता दौड़कर हमारे पास आयेगी। यदि सफलता नहीं मिल रही है तो हमारे कर्म में दोष है। वहाँ अपने कार्य का मूल्यांकण भी हमें स्वयं करना होगा। कमी को हटाकर सफलता के शिखर परआरोह के लिए फिर से प्रयास करना होगा। आलस्य को छोड़कर संघर्ष करना होगा। यदि हमारी इच्छा शक्ति क्षुद्र और दुर्बल होगी तो हमारी मानसिक शक्तियों का कार्य भी वैसा हो होगा। आज जितने भी सफल लोग हैं वे शुरू में अत्यधिक संघर्ष करने के बाद सफलता के शिखर पर पहुँचे हैं।

अतः मजबुत इरादे के साथ ही हम अपने लक्ष्य को पाने में सफल और भाग्य का निर्माता स्वयं बन सकते है।

रीना कुमारी
प्रा० वि० सिमलवाड़ी पश्चिम टोला
बायसी, पूर्णियाँ, बिहार

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11 thoughts on “मनुष्य अपना भाग्य निर्माता स्वयं है-रीना कुमारी

  1. बहुत ही बेहतरीन रचना….. बहुत खूब कहा है मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है…👌👌👌👌👌

    1. आपकी रचना बहुत ही बेहतरीन है। मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वं ही है। 👌👌

  2. Ye Mehnat sirf in badnasibon ke liye hai jo Gareeb hain …Jo chizen ham puri zindagi mehnat karke hasil karte hain ya hasrat loye hi mar jate hain …Kuch logun ko wo bachpan se hi prapt hota hai …Isiliye kaha Jata jiske Bhagya me jitna hai utna hi milega ……. Isilye Bhagya nirmata koi nahi ban sakta Bhagwan ke siwa ….Haan mehnat karke ham zindagi guzar sakte hain Bhagya Nirmata nahi ban sakte …🙂

    1. आपकी रचना बहुत ही बेहतरीन है। मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वं ही है। 👌👌

  3. प्रेरक प्रसंग रीना जी, बहुत –
    बहुत शुभकामनाएं आपको

  4. बहुत ही सुन्दर रचना है आदरणीया। वाकई परिश्रम, लगन, साधना व मजबूत इरादों से हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं। I think fortune can not help the idle man, It helps diligent person. उम्दा सृजन हेतु हृदय तल की अतल गहराईयों से धन्यवाद!

  5. Bilkul uchit aur yatharth baat likhi hai aapne bhabhi….hume apne jivan me apne hi karmon ka phal bhagya ke rup me prapt karte hain . Chahe is janam ke karm ho ya pichhle janam ke…vo upar wala kabhi galat hisab nahi karta isliye apne bhagya ka nirmata svayam hi hote hain…bahoot khoob bhabhi….keep it up…👌👌👍👍👍👍🌹🌹🌹🌹

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