मास्क की कहानी-धीरज कुमार - गद्य गुँजन

मास्क की कहानी-धीरज कुमार

Dhiraj

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मास्क की कहानी

          आज सारी दुनिया मास्क के नाम से परिचित है। एक छोटे बच्चे से लेकर बूढ़े व्यक्ति को भी मास्क के बारे में अच्छी जानकारी है। आज सभी मास्क की उपयोगिता को भी जान चुके है। हमारे लिए ये जानना बहुत जरूरी है की आखिर मास्क की शुरुआत कब और कैसे शुरू हुई?

मास्क के शुरुआत को जानने के लिए हमे आज से लगभग 681 वर्ष पूर्व जाना होगा।

साल 1340 में जब प्लेग की शुरुआत हुई थी उस वक्त बदबू से बचने के लिए बीक मास्क का इस्तेमाल किया जाता था। करीब साल 1600 में रुमाल का इस्तेमाल मास्क के तौर पर हुआ। साल 1897 में सर्जिकल मास्क अस्तित्व में आया जब बैक्टीरिया की समझ के बाद रुमाल का बेहतर संस्करण किया गया।साल 1910 में N-95 मास्क का पहला प्रारूप आया। साल 1918 में स्पेनिश फ्लू आया तो उस बुरे वक्त में महामारी में मास्क लगाना प्रतीक बना और फिर मास्क का इस्तेमाल होने लगा। साल 1930-40 में एयर फिल्टर गैस मास्क आया जब विश्व युद्ध में जहरीली गैस से बचने के लिए इस्तेमाल किया गया।साल 1961 में 3M सर्जिकल मास्क आए। दुनिया में पहली बार बबल वाला मास्क बना जो मास्क के इतिहास में बड़ा बदलाव था। पहली बार साल 1970 में N-95 मास्क तैयार हुए। पहली बार मापदंड और नियम तय हुए। साल 1972 में सिंगल यूज N-95 मास्क बनाए गए। 3M ने पहला सिंगल यूज N-95 मास्क बनाया था। साल 1990 में टीबी से बचाव में मास्क की अहम भूमिका देखी गई। इलाज के दौरान N-95 मास्क का इस्तेमाल किया गया। साल 2003 में चीन में सार्स महामारी में मास्क पहनना आम हो गया। साल 2005 में प्रदूषण से बचाव में N-95 मास्क का इस्तेमाल होने लगा। साल 2010 में मशहूर फैशल डिजाइन एलेक्सेंडर मैक्वीन ने अपने फैशन शो में मास्क को फैशन गैजेट के तौर पर प्रस्तुत किया था।

लेकिन किसने सोचा था साल 2020 में कोरोना महामारी में मास्क जीवन शैली का हिस्सा बन जाएगा।

धीरज कुमार
UMS सिलौटा
भभुआ कैमूर

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