फिरंगिया गीत के गायक-हर्ष नारायण दास - गद्य गुँजन

फिरंगिया गीत के गायक-हर्ष नारायण दास

Harshnarayan

 

फिरंगिया गीत के गायक

          हिन्दी भाषा-साहित्य के प्रखर विद्वान और चम्पारण आन्दोलन केजाने-माने सत्याग्रही मनोरंजन प्रसाद सिंह भोजपुरी भाषी थे। उनका जन्म शाहाबाद जिले अन्तर्गत डुमराँव में हुआ था।उनके मुँह से फिरंगिया गीत सुनकर महात्मा गाँधी रोमांचित हो उठते थे।प्रेम मिश्रित व्यंग्य के लहजे में गाँधी जी उन्हें “फ़िरंगवा” कहकर पुकारते थे।
प्रस्तुत है उनका फिरंगिया गीत
सुन्दर सुघर भूमि भारत के रहे राम,
आज उहे भइल मसान रे फिरंगिया।
अन्न धन जन बल बुद्धि सब नास भइल,
कवनो के ना रहल निसान रे फिरंगिया।
जहवां थोड़े दिन पहिले ही होत रहे,
लाखे मन गल्ला और धन रे फिरंगिया।
उहे आज हाय राम मथवा पर हाथ धरि,
बिलखि के रोवेला किसान रे फिरंगिया।

हाय दैव हाय हाय कौना पापे भइल बाटे,
हमनी के आज अइसन हाल रे फिरंगिया।
सात सौ लाख लोग दूनू साँझ भूखे रहे, हरदम पड़ेला अकाल रे फिरंगिया।
जेहू कुछ बाचेला न ओकरा के लादि लादि,
ले जाला समुंदर के पार रे फिरंगिया।
घरे लोग भूखे मरे गेहुआं विदेश जाय,
कइसन बाटे जग के व्यवहार रे फिरंगिया।
जहवां के लोग खात न आघात रहे,
रुपया से रहे मालामाल रे फिरंगिया।
उहे आज जेने जेने अंखिया घुमा के देखु, तेने तेने देखबे कंगाल रे फिरंगिया।
वणिज बेपार सब एकउ रहल नाही,
सबकर होइ गइल नाश रे फिरंगिया।तनि तनि बात लागि हमनी का हाय रामा, जोहिले विदेसिया के आस रे फिरंगिया।
कपड़ो जो आवेला विदेश से त हमनी का,
पेंहि के रहिला निज लाज रे फिरंगिया।
आज जे विदेसवा से आवेना कपड़वा त, लंगटे करब जा निवास रे फिरंगिया।
हमनी से सस्ता में रूई ले के ओकरे से,
कपड़ा बना -बना के बेचे रे फिरंगिया।
अइसही अइसही भारत के धनवा के लूटि-लूटि ले जाला विदेश रे फिरंगिया।
रुपया भारत के चालीस कोटि साले साल,
चल जाला दोसरा के पास रे फिरंगिया ।अइसन जे हाल कुछ दिन आउर रही रामा,
होइ जाई भारत के नास रे फिरंगिया।
स्वाभिमान लोगन में नामो के रहल नाही,
दिन रात करे जो खुशामद सहेब बा के चाटे ले विदेशिया के लातरे फिरंगिया।
जहवाँ भइल रहे राना परताप सिंह, और सुलतान अइसन वीर रे फिरंगिया।जिनकर टेक रहे जान चाहे चलि जाय,
तबहूँ नवाइब नाहिं सिर रे फिरंगिया उहवें के लोग आज अइसन अधम भइले, चाटे ले विदेसिया के पाँव रे फिरंगिया।
सहेबा के खुशी लागि करेलन सबहिन, अपने भइअवा के बात रे फिरंगिया।
जहवाँ भइल रहे अरजुन, भीम, द्रोन,भीषम, करन, सम सूर रे फिरंगिया।
उहे आज झुंड झुंड कायरन के बास बाटे,
साहस वीरत्व गइल दूर रे फिरंगिया।
केकरा करनिया कारन हाय भइल बाटे, हमनी के अइसन हवाल रे फिरंगिया।
धन गइल, बल गइल, बुद्धि गइल, विद्या गइल, हो गइनी जा निपटे कंगाल रे फिरंगिया।।
सब विधि भइल कंगाल देस तेहु पर,
टिकस के भार तें बढवले रे फिरंगिया।
नून पर टिकसवा,आकुली पर टिकसवा,सब पर टिकसवा लगवले रे फिरंगिया।
स्वाधीनता हमनी के नामो के रहन नाही, अइसन कानून के बरे जाल रे फिरंगिया।
प्रेस एक्ट, आर्म्स एक्ट, इंडिया डिफेंस एक्ट,
सब मिलि कइलस इ हाल रे फिरंगिया।
प्रेस एक्ट लिखे के स्वाधीनता के छीन लेलस, आर्म्स एक्ट लेलस हथियार ने फिरंगवा।
इंडिया डिफेंस एक्ट रच्छक के नाम लेके,
भच्छक के भइल अवतार रे फिरंगिया।
हाय हाय केतना जुवक भइल भरत के,एही जाल फँसी नजरबंद रे फिरंगिया।
केतना सूपत पूत एकरा करनवां से,
पड़ले पुलिसवा के करि के सुरतिया से, फाटेला करेजवा हमार रे फिरंगिया।
भारते का छाती पर भारते के बचवन के,
बहल रकतवा के धार रे फिरंगिया।
छोटे-छोटे लाल सब,बालक मदन सब,
तड़पि-तड़पि देले जान रे फिरंगिया।
छट पट करि -करि बूढ़ सब मरि गइले,
मरि गइले सुघर जवाने रे फिरंगिया।
बुढ़िया मतारि के लकुटिया छिनाइ गइल,
जे रहे बुढापा के सहारे रे फिरंगिया।
जुवनी सती के हाय प्रानपित विलग भइले, रहे जेहू जीवन के आधार ले फिरंगिया।
साधुआ के देहिया पर चुनवा के पोति-पोति, रंडी आगे लंगट नचवले रे फिरंगिया।
हमनी के पसु से भी हालत खराब कइले, पेटवाके बल रेंगववले रे फिरंगिया।
हाय हाय हाय सब रोवत बिकल होके, पीटि-पीटि आपन कपार रे फिरंगिया।जिनकर हाल देखि फाटेला करेजवा से, अंसुआ बहेला चहुँ धार रे फिरंगिया।
भारत बेहाल भइल लोग के इ हाल भइल, चारों ओर मचल हाय-हाय रे फिरंगिया।तेहु पर अपना कसाई अफ़सरवा के, देले नाहीं कवनो सजाय रे फिरंगिया।
चेति जाऊ चेति जाउ भइया रे फिरंगिया से,
छोड़ि के अधरम के पंथ रे फिरंगिया।
भला तोर करी भगवंत रे फिरंगिया।
ठुकिया के आह तोर देहिया भसक करी, जरि भूनी होइ जइबे छार रे फिरंगिया।
एहिं से त कहतानी भइया रे फिरंगी तोहे,धरम के कह ते विचार रे फिरंगिया।
जुलूमि कानून के टिकसवा के रद कर दे,
भारत के दे दे स्वराज रे फिरंगिया।
नाही तब साँचे-साँचे तोरा से कहत बानी, चौपट जो जाई तोर राजा रे फिरंगिया।
तैतीस करोड़ लोग आँसुआ बहाई ओ में,
बहि जाय तोहरे समाज रे फिरंगिया।
अन धन जन बल सकल बिलाय जाई, डूब जाई राष्ट्र के जहाज रे फिरंगिया।।

फिरंगिया के इस अमर गायक को कोटिशः नमन।

हर्ष नारायण  दास
मध्य विद्यालय घीवहा
फारबिसगंज (अररिया)

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