हेमन्त कुमार के जन्म शताब्दी पर विशेष
गायक एवं संगीतकार हेमन्त कुमार जी का जन्म 16 जून 1920 को बनारस के एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था।वे जाधवपुर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग का कोर्स छोड़कर संगीत का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।1935 में उन्हें कोलकाता के न्यू थियेटर्स की एक फ़िल्म में समूह गीत गाने का अवसर मिला।बंकिमचंद्र चटर्जी के प्रसिद्ध उपन्यास”आनंद मठ” पर बने फ़िल्म के संगीत का धुन उन्होंने ही दिया।लता मंगेशकर के साथ राष्ट्रगीत”वंदे मातरम”के गायन के लिये अमर धुन तैयार की।
हेमंतकुमार की पहचान1955 में आई”नागिन”से बनी।इसके संगीत की सबसे बड़ी खासियत थी बीन की धुन, जो हेमंतकुमार के निर्देशन में उस समय उनके सहायक और बाद में जाने माने संगीतकार बने रवि और कल्याणजी ने कलेवायलिन पर बजाई थी।
इसके बाद हेमंतकुमार बांग्ला और हिन्दी फिल्मों में समान रूपसे संगीतकार एवं गायक के रूप में सक्रिय हो गए।उन्होंने गीतांजलि पिक्चर्स के नाम से अपनी फिल्म निर्माण संस्था स्थापित की और “बीस साल बाद” फ़िल्म का निर्माण किया जो एक सुपर हिट फिल्म थी।उन्होंने अपने बैनर तले”कोहरा ,बिन बादल बरसात” राहगीर, खामोशी जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया। 1952 में निर्देशक गुरूदत्तके फ़िल्म जाल में गीत गाये ,गीत के बोल था-ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ, सुन जा दिल की दास्तान,और जाने वे कैसे लोग थे ,जिनके प्यार को प्यार मिला ,जैसे हिट गीत गाये ।उन्होंने साहब बीबी और गुलाम फ़िल्म का संगीत भी तैयार किया था।उन्होंने अपने संगीत निर्देशन में उस दौर के बड़े गायक मो०रफी, तलत महमूद, किशोर कुमार को भी गवाया।
1956 में फ़िल्म नागिन के लिये बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फ़िल्म फेयर अवार्ड जीता।1971 में बंगाली फ़िल्म”निमंत्रण”के लिये बेस्ट प्लेबैक सिंगर का नेशनल फ़िल्म अवार्ड जीता।1985 में विश्वभारती विश्वविद्यालय द्वारा डी-लिट् की मानद उपाधि दी गई।1986 में”ललन फ़क़ीर के लिए बेस्ट प्ले बैक सिंगर के रूप में नेशनल फ़िल्म अवार्ड जीता।1989 में माइकल मधुसूदन पुरस्कार दिया गया।
हेमंत दा के संगीत निर्देशन में”नागिन”में लता जी के स्वर में”तन डोले मेरा मन डोले”और जादूगर सैयां, जैसे गीत उस जमाने में फिल्मी गीतों की लोकप्रियता के सबसे बड़े पैमाने-रेडियो सीलोन पर प्रसारित होने वाले बिनाका गीतमाला कार्यक्रम के अन्तर्गत कड़े मुकाबले के बाद साल के सरताज गीत बने थे।उनका मुकाबला था नौशाद(उड़ न खटोला)सी०रामचंद्र(आजाद)एस डी०वर्मन(मुनीमजी)और शंकर जयकिशन(श्री420)जैसे दिग्गज संगीतकारों के हिट गीतों से।
ऐसे महान संगीतकार और गायक कलाकार का27 सितम्बर1989 कोलकाता में हो गया उनके सुरीले संगीत को सुनकर मन अध्यात्म की ऊंचाइयों तक पहुंच जाता है।उनके द्वारा गाया गीत”या दिल की सुनो दुनिया वालों या मुझको अभी चुप रहने दो।’मन मस्तिष्क में गूँजने लगता है।
कहीं दीप जले, कहीं दिल ,जैसे गीत के संगीतकार को उनके जयन्ती पर कोटिशः नमन।
प्रेषक – हर्ष नारायण दास
फारबिसगंज।