सदियों तक गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारत माता को असंख्य वीर सपूतों से लड़ने के बाद आजादी की अमृत बेला देखने को मिली, पर इसकी बहुत बड़ी कीमत हमें चुकानी पड़ी। उन लाखों लोगों के जान गंवाने तथा उनकेबेघर होने के बाद मिली आजादी के जश्न मनाने में आज हम इतने मशगूल हो गए हैं कि हम भूल गए कि आज ही के दिन 14 अगस्त 1947 को क्या हुआ था।
रातों-रात लाखों लोगों का भविष्य बदल गया। रातों– रात उन्हें वर्षों की बसे-बसाए घरों को छोड़ने के मजबूर होना पड़ा। सोचिए कितना दुःखदाये और कष्टदायक पल रहा होगा। उनके लिए इस विभाजन से 10–20 लाख लोग विस्थापित हुए और 2 लाख लोग मारे गए।
आज के दिन यानी 14 अगस्त को 1947 के भारत विभाजन के दौरान लाखों पीड़ित लोगों के कष्टों को याद किया जाता है। उस समय की तस्वीरें जब भी हम देखते हैं, मन पीड़ा और कटुता से भर जाता है और सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि क्या हमने ऐसी आजादी मांगी थी या सपने में भी हमने कल्पना की थी।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उस अकल्पनीय पीड़ा को स्मरण करने और उससे यह सीख लेकर राष्ट्र की एकता, अखंडता को सर्वोच्च मानने का संदेश देता है। उनकी स्मृतियाँ हमें सदैव एक सशक्त, संगठित और अखंड भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
नाम – बबीता कुमारी
राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय महरैल कन्या अंधराठाढ़ी मधुबनी