भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दृष्टिकोण से आज की तारिख कटिहार जिले के लिए अविस्मरणीय रहा है।महात्मा गांधी के द्वारा जब 8अगस्त 1942 को “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया गया तो इसकी आंच कटिहार जिले में दस अगस्त से महसूस की जाने लगी थी।
अंग्रेजों की दमनकारी नीति ने यहाँ की जनता को भी स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका निभाने के लिए उग्र कर दिया था।तत्कालिन कटिहार, पूर्णिया जिले का एक अनुमंडल हुआ करता था।
कटिहार शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित आज का शहीद चौक क्रांतिकारीयों की गतिविधि का केंद्र हुआ करता था।
आज से ठीक अस्सी साल पहले आज के ही दिन यानि 13अगस्त 1942 को तेरह वर्षीय ध्रुव कुंडू के नेतृत्व में स्वतंत्रता सेनानीयों का एक दल रजिस्ट्री आफिस को आग के हवाले कर चुका था और मुंसफ कोर्ट के युनियन जैक को उतार कर तिरंगे को फहराते हुए थाने पर तिरंगा फहराने को आगे बढ़ रहा था।तभी तत्कालीन एस डी ओ फनी मुखर्जी ने उन्हें रूकने को कहा लेकिन आजादी के दिवाने कब मानने वाले थे, नतीजा यह हुआ कि पुलिस ने गोली चलाई जो ध्रुव कुंडू को गोली लगी और उसी रात इलाज के दौरान पुर्णिया में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा सेनानी ने अपनी शहादत देश के लिए दी।
किशोरी लाल कुंडू के पुत्र ध्रुव कुंडू सातवीं तक रामकृष्ण मिशन कलकत्ता में पढ़े-लिखे और आठवीं में स्थानीय महेश्वरी एकेडमी, कटिहार के छात्र रहे थे।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का संभवतः सबसे युवा शहीद ध्रुव कुंडू को हमारा नमन है।🙏
शहीद ध्रुव कुंडू के अलावा जूट मिल मजदूर युनियन के नेता राम आशीष जी,सहित कुल तेरह लोगों ने जिसमें शहीद चौक पर सात, देवीपुर, कुर्सेला में पांच और झौवा में एक क्रांतिकारी ने अपनी शहादत दी थी।जिनके याद में शहीद चौक के पास,नगर भवन के सामने ही शहीद स्तम्भ बना हुआ है।सभी शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए हमें चाहिए की देश की आन शान को ऊंचा रखें।
#हरघरतिरंगाअभियान
डॉ० अजय कुमार
उत्क्रमित मध्य विद्यालय चाँपी, कोढ़ा, कटिहार ( बिहार)