संस्मरण: योग ने मेरे जीवन में क्या परिवर्तन लाया।
आज से 12 वर्ष पूर्व 2013 में मैंने प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका के रूप में योगदान किया था और तब मैं बहुत पतली, दुबली, कमज़ोर सी लगती थी। विद्यालय से पढ़ा कर जब घर आती तो मुझे बहुत थकान हो जाती थी और सुस्त होकर प्रतिदिन लेट जाती। फ़िर मेरा मन करता कि पैर हाथ की मालिश करवाऊं। प्रतिदिन विद्यालय से आकर सोने की आदत हो गई थी।
फ़िर विद्यालय प्रातः कालीन हो गया और बच्चे सुबह सुबह जल्दी उठ कर जो आते थे उस कारण वो भी सुस्त नज़र आते। बच्चों को देख कर मेरे मन में ख़्याल आया कि इनकी सुस्ती को दूर करने का उपाय किया जाए और मैंने योगा पर विचार किया। मुझे लगा योगा बच्चों के लिए एक प्रकार की मनोरंजन गतिविधि है जिसे वो खुशी–ख़ुशी कर भी लेंगे साथ ही उनका स्वास्थ अच्छा होगा और सुबह में फुर्ती और ताज़गी महसूस करेंगे। और विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ेगी। वे स्वच्छता का मतलब भी समझ पाएंगे।
विद्यालय में इसको करवाने के लिए मैंने मोबाइल पर सभी योगा के बारे में सर्च करते हुए सभी के फायदों की जानकारी ली क्योंकि कहा जाता है जब कोई नया कार्य दूसरों से करवाना हो तो पहले ख़ुद उसे करके देखो और सही जानकारी के साथ आगे बढ़ो।
विद्यालय में छुट्टी के समय मैंने सभी बच्चों से कहा आप सभी कल समय से दाँत साफ़ करके, नहा कर और साफ कपड़े पहन कर विद्यालय आइएगा और साथ ही दूसरे छात्र/छात्राओं को भी लेकर आइएगा क्योंकि कल हमलोग मनोरंजक गतिविधि करने वाले हैं। आपलोगों को मज़ा भी आयेगा और शरीर से तंदुरुस्त होने के साथ ही पढ़ने में भी होशियार हो जाइयेगा। बच्चे बहुत खुश हो कर घर गए ताकि कल नई चीज़ के लिए विद्यालय आए।
अगले दिन विद्यालय में प्रार्थना की घंटी बजी और सभी बच्चे पंक्ति में आ गए। उनके मन में नई गतिविधि के लिए उत्साह और उमंग था।
मैंने सभी बच्चों को पंक्ति में खड़ा करके अपने अपने जगह पर आसन लगा कर बैठा दिया फ़िर सभी को आँख बंद करके ध्यान लगाने को कहा ताकि आगे का अभ्यास अच्छा से हो सके। और मन को एकाग्र करना आए। मैंने सामने बैठ कर ख़ुद आसन लगाया ताकि वो मुझे देख कर अच्छे से करे। पद्मासन मैंने ख़ुद भी किया और बच्चों से भी करवाया। उसके बाद कुछ exercise भी करवाए ताकि उछल कूद कर उनको मज़ा आए। बच्चे खूब खुश हुए साथ ही मैंने भी स्फूर्ति महसूस की। इसके बाद प्रार्थना हुई और सभी बच्चे अपने–अपने वर्ग कक्ष में गए। पढ़ाई प्रारंभ हुई तो बच्चों ने पढ़ाई में मन लगाया और सभी ऊर्जावान लग रहे थे। सुस्ती की जगह फुर्ती नज़र आ रही थी।यह हमारा प्रतिदिन का दिनचर्या हो गया था।
प्रतिदिन एक एक नए आसन को शामिल किये ताकि नई गतिविधि उनके सामने आए साथ ही उसके बारे में जानकारी दिए कि ये करने से ये फायदा और हमारे स्वास्थ पर इनका क्या असर होता है सबकुछ प्रतिदिन बताएं। ताकि वो घर जा कर अपने अभिवावक को भी अच्छी जानकारी दे पाएं। जब तक प्रातः कालीन विद्यालय रहा बच्चों में परिवर्तन आ गया वो तरो ताज़ा महसूस करते थे और प्रतिदिन साफ़ सुथरे होकर विद्यालय आते। नाखून भी काटते। उनके स्वास्थ में भी परिवर्तन आया। पेट की कई बीमारियां ठीक हो गई। उनके घर में अभिवावकों को भी एहसास हुआ कि दवाइयों का खर्चा कम हो रहा है। बच्चे कम बीमार पड़ रहे हैं। वो भी खुशी से बच्चों को विद्यालय भेजने लगे।
जैसा कि मैंने शुरुआत में कहा कि मैं भी विद्यालय से आने के बाद सुस्त महसूस करती थी तो अब प्रतिदिन योगाभ्यास करने से मैंने ख़ुद को भी तरो ताज़ा महसूस किया और साथ ही पहले से अधिक शारीरिक और मानसिक रूप से ख़ुद को मज़बूत पाया। मेरे में प्रतिदिन एक नई ऊर्जा का विकास हो रहा था जो मुझे कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा था।
10 साल मैं प्राथमिक विद्यालय में पदस्थापित रही और प्रत्येक वर्ष कितने नए बच्चे आए और पुराने गये पर हमारा योगाभ्यास चलता रहा।
आज मैं bpsc की परीक्षा देकर +2 की शिक्षिका बन गई पर मेरे द्वारा किए गए प्रयास आज भी कार्यशील है। अभी बड़े बच्चों को भी मैं याेग के फायदे बताते हुए उनको स्वास्थ के प्रति जागरूक करती हूं। मेरा 12 साल का अनुभव ये कहता है कि मैंने खुद में बहुत परिवर्तन देखा। मैं स्लिम फिट हूं और ऊर्जावान होकर आज भी विद्यालय में कार्य करती हूं। मुझे लगता है कि योग अभ्यास प्रतिदिन करने से हम सच में ख़ुद को परिवर्तित कर सकते हैं साथ ही स्वास्थ में भी सुधार ला सकते हैं। आप सभी भी इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें 🙏 यह तो थी मेरी कहानी
नाम – नेहा कुमारी
विद्यालय – रा स हरावत राज उच्च माध्यमिक विद्यालय, गणपतगंज
प्रखण्ड – राघोपुर
ज़िला – सुपौल