Tag: देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

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रक्षाबंधन पावन नेह की पहचान का पर्व-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’रक्षाबंधन पावन नेह की पहचान का पर्व-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

1 Comment 3:18 pm

रक्षाबंधन पावन नेह की पहचान का पर्व पावन रेशम सूत में, देखो अनुपम प्यार। भगिनी राखी बाँधती, करे भ्रातृ मनुहार।।[...]

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स्तनपान शिशु के लिए वरदान-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’स्तनपान शिशु के लिए वरदान-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 4:57 pm

 स्तनपान शिशु के लिए वरदान पहला टीका मातु का, हृदय से अमृत मान। शिशु हित यह वरदान है, नियमित हो[...]

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प्रेमचंद हमारे युगद्रष्टा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेमचंद हमारे युगद्रष्टा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:25 pm

प्रेमचंद हमारे युगद्रष्टा           आज हमारे देश के जाने-माने कथा सम्राट उपन्यासकार, युगद्रष्टा मुंशी प्रेमचंद की[...]

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हमारी संस्कृति का प्रतीक गंगा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’हमारी संस्कृति का प्रतीक गंगा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

1 Comment 2:56 pm

 हमारी संस्कृति का प्रतीक गंगा पापनाशिनी मोक्षदायिनी पुण्यसलिला अमरतरंगिनी। ताप त्रिविध माँ तू नसावनी तरल तरंग तुंग मन भावनी।।  [...]

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स्नेह-प्रेम के दो शब्द-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’स्नेह-प्रेम के दो शब्द-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

4 Comments 12:33 pm

स्नेह-प्रेम के दो शब्द            लॉकडाउन का पहला चरण, दूसरा चरण फिर तीसरा चरण को तो[...]

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