रक्षाबंधन पावन नेह की पहचान का पर्व पावन रेशम सूत में, देखो अनुपम प्यार। भगिनी राखी बाँधती, करे भ्रातृ मनुहार।।[...]
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स्तनपान शिशु के लिए वरदान-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’स्तनपान शिशु के लिए वरदान-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
स्तनपान शिशु के लिए वरदान पहला टीका मातु का, हृदय से अमृत मान। शिशु हित यह वरदान है, नियमित हो[...]
प्रेमचंद हमारे युगद्रष्टा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेमचंद हमारे युगद्रष्टा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रेमचंद हमारे युगद्रष्टा आज हमारे देश के जाने-माने कथा सम्राट उपन्यासकार, युगद्रष्टा मुंशी प्रेमचंद की[...]
हमारी संस्कृति का प्रतीक गंगा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’हमारी संस्कृति का प्रतीक गंगा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
हमारी संस्कृति का प्रतीक गंगा पापनाशिनी मोक्षदायिनी पुण्यसलिला अमरतरंगिनी। ताप त्रिविध माँ तू नसावनी तरल तरंग तुंग मन भावनी।। [...]
लगन का फल-देव कांत मिश्र दिव्यलगन का फल-देव कांत मिश्र दिव्य
लगन का फल किसी कार्य में सफल होने के लिए खुद पर भरोसा रख कर[...]
स्नेह-प्रेम के दो शब्द-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’स्नेह-प्रेम के दो शब्द-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
स्नेह-प्रेम के दो शब्द लॉकडाउन का पहला चरण, दूसरा चरण फिर तीसरा चरण को तो[...]