Teacher – Sheela Kumari



“मेरी योग यात्रा : स्वास्थ्य, शांति और आत्मविश्वास की ओर”

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का अवसर मेरे लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मविकास का अवसर भी है। एक शिक्षिका होने के नाते मैं प्रतिदिन बच्चों को अच्छे संस्कार, अनुशासन और स्वस्थ जीवन का संदेश देने का प्रयास करती हूँ। इसी क्रम में योग मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। योग ने न केवल मेरे शरीर को स्वस्थ बनाया है, बल्कि मेरे मन को भी शांति और स्थिरता प्रदान की है।

मुझे याद है कि कुछ वर्ष पहले तक मैं योग को केवल एक प्रकार का व्यायाम समझती थी। विद्यालय में योग दिवस मनाया जाता था और हम सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी उसमें भाग लेते थे। उस समय मैं योग के महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पाई थी। धीरे-धीरे जब मैंने नियमित रूप से योग करना प्रारंभ किया, तब मुझे इसके वास्तविक लाभों का अनुभव होने लगा।

शुरुआत में मैं प्रतिदिन कुछ सरल आसन और प्राणायाम करती थी। कुछ ही दिनों में मुझे अपने शरीर में सकारात्मक परिवर्तन महसूस होने लगे। पहले जहाँ छोटी-छोटी बातों पर तनाव हो जाता था, वहीं अब मन अधिक शांत और संतुलित रहने लगा। नियमित योग के कारण शरीर में स्फूर्ति बनी रहने लगी और कार्य करने की क्षमता भी बढ़ गई। एक शिक्षिका के रूप में पूरे दिन सक्रिय रहना पड़ता है। योग ने मुझे यह ऊर्जा प्रदान की।

विद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। इस अवसर पर विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक सभी योग के महत्व को समझते हैं। जब मैं बच्चों को योग करते हुए देखती हूँ, तो मुझे बहुत प्रसन्नता होती है। बच्चों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन और प्राणायाम करते देखकर विश्वास होता है कि वे स्वस्थ और जागरूक नागरिक बनेंगे। कई बार बच्चों ने मुझसे कहा कि योग करने से उनका मन पढ़ाई में अधिक लगता है। यह सुनकर मुझे अत्यंत संतोष मिलता है।

योग ने मुझे धैर्य और आत्मविश्वास भी सिखाया है। जीवन में अनेक परिस्थितियाँ ऐसी आती हैं जब मन विचलित हो जाता है। ऐसे समय में योग और ध्यान हमें स्वयं से जोड़ते हैं। कुछ मिनटों का ध्यान मन को नई शक्ति प्रदान करता है। मैंने अनुभव किया है कि जब मन शांत होता है, तब हम बेहतर निर्णय ले पाते हैं और कठिन परिस्थितियों का सामना भी सहजता से कर सकते हैं।

योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने का मार्ग भी है। यह हमें अनुशासन, संयम और सकारात्मक सोच की शिक्षा देता है। आज के समय में जब लोग तनाव, चिंता और असंतुलित जीवनशैली से जूझ रहे हैं, तब योग एक प्रभावी समाधान के रूप में हमारे सामने है। योग हमें प्रकृति के निकट ले जाता है और अपने भीतर झाँकने की प्रेरणा देता है।

एक शिक्षिका होने के कारण मैं अपने विद्यार्थियों को भी योग अपनाने के लिए प्रेरित करती हूँ। मेरा विश्वास है कि यदि बचपन से ही योग को जीवन का हिस्सा बना लिया जाए, तो भविष्य में अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सकता है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और योग दोनों को विकसित करने का श्रेष्ठ साधन है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। योग भारत की महान सांस्कृतिक विरासत है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। आज योग की महत्ता को पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। यह हमारे देश के लिए भी गर्व का विषय है।

मेरे जीवन में योग ने जो सकारात्मक परिवर्तन किए हैं, वे मेरे लिए अमूल्य हैं। योग ने मुझे स्वास्थ्य, शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया है। मैं प्रतिदिन योग करने का प्रयास करती हूँ और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करती हूँ। मेरा विश्वास है कि यदि हम सभी अपने जीवन में योग को अपनाएँ, तो हमारा जीवन अधिक स्वस्थ, संतुलित और सुखमय बन सकता है।

अंततः मैं यही कहना चाहूँगी कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह हमें स्वयं से जोड़ता है, हमारी आंतरिक शक्ति को जागृत करता है और जीवन को नई दिशा देता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँगे और स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे।यह संस्मरण प्रतियोगिता के लिए उपयुक्त है। यदि शब्द सीमा सख्ती से 1000 शब्द के आसपास चाहिए, तो इसे और विस्तृत किया जा सकता है।

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