परामर्श शुल्क के अभाव में दो बार क्लीनिक से लौटाये जाने के बाद वह तीसरी दफे रुपये जुटाकर अपने दस[...]
Category: हिन्दी कहानी
नमक हराम -संजीव प्रियदर्शीनमक हराम -संजीव प्रियदर्शी
‘रमेश बिल्कुल नमक हराम निकला। कितना समझाया था कि बाबूजी को घर पर रखकर उनकी अच्छी तरह देखभाल किया करना।[...]
धरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शीधरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शी
रमिया और टुनका दहाड़ें मार कर रो रहे थे। रोते भी क्यों नहीं, जिगर का एक ही तो टुकड़ा था[...]
संदिग्ध आँखें-विजय सिंह नीलकण्ठसंदिग्ध आँखें-विजय सिंह नीलकण्ठ
संदिग्ध आँखें बाजार से लौटते समय जिग्नेश की बाइक के दाईं मीरर पर किसी गाड़ी[...]
आशीर्वाद-कुमारी निरुपमाआशीर्वाद-कुमारी निरुपमा
आशीर्वाद माॅं की तबीयत जब भी खराब होती थी मोनिया को पिंकी दीदी के घर[...]
महर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी-हर्ष नारायण दासमहर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी-हर्ष नारायण दास
महर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी राजा उपरिचर, चेदि देश के राजा थे। वे बड़े[...]
अपनी माटी-कुमारी निरुपमाअपनी माटी-कुमारी निरुपमा
अपनी माटी आरुणि के प्रश्नों का जवाब देते देते-देते उसके पापा कभी-कभी झुंझला कर उसे[...]
भोलवा का कुर्ता-चाँदनी समरभोलवा का कुर्ता-चाँदनी समर
भोलवा का कुर्ता उसने आंख खोलकर एक बार देखा और फिर अपनी फटी कम्बल खींच[...]
समझू-विजय सिंह नीलकण्ठसमझू-विजय सिंह नीलकण्ठ
समझू मे आई कम इन सर? समझू ने वर्ग कक्ष के दरवाजे पर खड़े होकर[...]
असली बेटा-धीरज कुमारअसली बेटा-धीरज कुमार
असली बेटा सुबह के लगभग 9:00 बज रहे होंगे। गुप्ता जी बाजार से सब्जी लेकर[...]