मॉंं-नीभा सिंह - गद्य गुँजन

मॉंं-नीभा सिंह

मॉं

जब जब कागज पर लिखा मैंने मां
का नाम,
कलम अदब से बोल उठी हो गए
चारों धाम।।🙏

          सच मां एक अलौकिक शब्द है। जिसके स्मरण मात्र से ही रोम-रोम पुलकित हो उठता है। हृदय में भावनाओं का अनहद ज्वार उमड़ पड़ता है। मां एक अबोध मंत्र है जिसके उच्चारण मात्र से हीं हर पीड़ा का नाश हो जाता है। मां अपने बच्चों के खुशी लिए सारी दुनिया से लड़ लेती है। मां को ममता की मूर्ति कहा जाता है। या यूं कहा जाए कि मां के बिना जिंदगी अधूरी है तो गलत नहीं होगा।

यक्ष ने जब धर्मराज युधिष्ठिर से पूछा था कि पृथ्वी से भारी कौन है?
तब युधिष्ठिर ने जवाब दिया था –

“माता गुरुतरा भूमे:”।

अर्थात मां इस पृथ्वी से भारी है।

यक्ष के पूछने पर युधिष्ठिर ने माता को भूमि से भारी और पिता को आकाश से ऊंचा बताया।

इसके अलावे वेदों में मां के बारे में बहुत कुछ लिखा है। वेद कहते हैं कि मैं अपनी औलाद के लिए ममतामयी, समतामती, स्नेहमती और अपनी औलाद के हित के लिए समर्पण करने वाली होती हूं। यूं तो समस्त संसार हीं प्रभु का स्वरूप है लेकिन इस स्वरूप संसार में मां उत्पादिका तथा पोषिका है। माता मनुष्य की सबसे प्रथम और सबसे श्रेष्ठ गुरु है।

बालक का मां के गर्भ में आते ही कुछ न कुछ सीखना शुरू हो जाता है। जैसे अभिमन्यु ने मां के गर्भ में चक्रव्यूह में प्रवेश करने की विद्या प्राप्त कर ली थी।
मां की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम होगी। अपनी औलाद के लिए जीने वाले हस्ती का नाम ही मां है।

किंतु आज के बदलते परिवेश में बच्चे अपनी जिंदगी सॅंवारने बाहर निकल रहे हैं और मां-बाप घर में अकेले। जो बहुत दुखद है। हमें अपने कैरियर के साथ-साथ उनके प्रति जिम्मेदारी निभाना होगा क्योंकि उन्होंने हमारे लिए बहुत त्याग किया है। व्यस्त होने के बावजूद भी हमें उनके लिए समय देना होगा। कुछ समय उनसे प्यार भरी बातें करनी होगी। उनकी देख-रेख करनी होगी। मां-बाप ऐसे फलदायी वृक्ष की तरह हैं जिनके छांव में रहना बहुत सुकून देता है।

सभी माताओं को सम्मान देने के उद्देश्य से मातृ दिवस भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न दिन मनाया जाता है।
मां के प्यार , सेवा, सुरक्षा, देख-रेख एवं त्याग इत्यादि के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए भारत, अमेरिका, कनाडा इत्यादि देशों में मातृ दिवस मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।

किंतु मां के लिए कोई एक दिन काफी नहीं है क्योंकि मां प्रकृति के तरह होती है जो हमेशा हमको देती है और बदले में हमसे कुछ भी नहीं लेती है। इतिहास में कई ऐसी घटनाओं का वर्णन है जिसमें माताओं
ने अपने संतान के लिए सर्वस्व न्योछावर किया है।

मां की ममता और उनके ऑंचल की महिमा का शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। इसलिए तो कहा गया है कि

🙏🌹 “मातृ देवो भव:”🌹🙏

अर्थात मां ईश्वर तुल्य है ।अतः इनका सम्मान करें।🙏🙏

🙏💐 मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।💐🙏

नीभा सिंह
फारबिसगंज, अररिया

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7 thoughts on “मॉंं-नीभा सिंह

  1. Maa ke kya kahne. The dialogue ‘mere pas maa hai’. Real asset of life.
    Thanks for amazing blog. Great lesson to youngester also. With best wishes on mother day 🤱🙏

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