(नेपाल बाढ़, रिपोर्ताज )
तिब्बत के ऊंचे पर्वतीय इलाके में ग्लेशियर (बर्फ और चट्टानों) का एक विशाल हिस्सा अचानक ढह गया है ।
इस भीषण भूस्खलन ने भोटे- कोशी नदी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया। कुछ ही देर में जब मलबे का यह अस्थायी बांध टूटा, तो कई मंजिल ऊंचा पानी और कीचड़ का सैलाब रसुवागढ़ी बॉर्डर पर आ धमका। चीन-नेपाल को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज ‘, सीमा शुल्क कार्यालय और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट ताश के पत्तों की तरह बह गए।
इस आपदा में 95 से अधिक मौतों की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।
नेपाल से बिहार का नदी कनेक्शन
तिब्बत से निकली भोटे कोशी नदी नेपाल में त्रिशूली में मिलती है और आगे जाकर नारायणी का रूप लेती है। यही नारायणी नदी जब भारत की सीमा में दाखिल होती है, तो इसे गंडक कहा जाता है।
चूंकि तबाही गंडक के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई है, इसलिए इस भयानक सैलाब का सीधा रुख अब उत्तर-पश्चिमी बिहार की ओर है।
जिसमें मुख्य रूप से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर के निचले तथा दियारा इलाकों के प्रभावित होने की पूरी संभावना है ।
बचाव अभियान: एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ की टीमें सीमावर्ती इलाकों में तैनात हैं,
जबकि गंडक के तटबंधों पर 24 घंटे की नाइट गश्त शुरू कर दी गई है।
पहाड़ों पर आई यह त्रासदी अब बिहार के मैदानी इलाकों के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुकी है।