गद्य गुँजन योगदूत 2026 “शहर की सैर” – NIRAJ KUMAR JHA

“शहर की सैर” – NIRAJ KUMAR JHA



“शहर की सैर ”

खानपान की बहुत हो गई बात।

चलें घूमें, टहलें जब बीत गई रात। 

जी में आया और हमने कर दी इसकी शुरुआत।

अब तो आएगी ताजगी,जब हमने सोची है ऐसी बात।

ढूंढते मैदान को  निरंतर चला मैं मीलों पार।

जहाँ कभी थे मैदान वहाँ लग गए कार हजार।

प्रथम दिवस ही हो गया मैं थककर चकनाचूर। 

दोस्तों ने कहा ऐसे ही हर कोई नहीं बन जाता शूर।

है वह समय जब एक देश दूसरे पर कर रहे हैं आक्रमण। 

गोले- बारूदों से बढ़ता प्रदूषण, कैसे कम हो संक्रमण।

सुबह ताजी हवा की खातिर सोचा कहीं मिल जाए हरे पेड़।

 जिधर भी नज़र दौराऊँ, हर जगह मिलते कूड़े के ढेर।

स्वास्थ्य सबसे बड़ा है धन,ऐसा कहते सभी लोग।

स्वास्थ्य की खातिर शुरू कर दिया है मैंने योग।

शुरू कर दिया है मैं योग। 

नीरज कुमार झा 

विद्यालय अध्यापक (11-12)

उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय भवानीपुर,नारायणपुर, भागलपुर ।

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