“कूड़े के ढेर हैं दुनिया की अगली चुनौती”
पर्यावरण वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के आँकड़े यह बताते हैं कि अप्रत्याशित जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रकृति के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है। दुनिया के 50 देश अपशिष्ट के महाकाय क्षेत्र में है। कूड़े की विशाल बस्तियाँ भारत अथवा अन्य देशों में भी है,परंतु उनका सही ब्यौरा अभी भी अनुपलब्ध है।
सुविधा उपलब्ध न होने के कारण लगभग 50% कचरा खुले में सड़ता है, जिसके कारण वहाँ आस-पास रहने वाले लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं। कूड़े की रीसाइकलिंग महँगी होने के कारण इसका विवेकपूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। यह अपशिष्ट पदार्थ एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित तो हो जाता है,परंतु स्थिति पूर्ववत बनी रहती है। कहने का तात्पर्य यह है कि नगर -निगम व्यवस्था द्वारा इन अपशिष्टों को किसी अन्य खुले स्थान पर फेंका जाता है। कूड़ा कर्मी कहीं-कहीं नंगे हाथों काम करते हैं, जिसके कारण हाथ कटने और संक्रमण का खतरा बना रहता है। साधन के अभाव में बिना मास्क के नंगे हाथों ये गरीब विषाक्त मल अथवा कूड़ा -कचरा फेंकने को विवश हैं। जठराग्नि की शाँति हेतु बहुत से गरीब उस कचरे में खाद्य सामग्री ढूँढने हेतु मजबूर हैं। विषाक्त भोजन करने के कारण वे निरंतर बीमार हो रहे हैं।
भीषण गर्मी में बिना ढंका कचरा तरह-तरह के खतरनाक कीटाणु और जहरीली गैस उत्पन्न करता है। बारिश होने पर इससे रिसने वाला जल भूमिगत हो जाता है और आसपास के नदी नालों और जलाशयों को प्रदूषित करता है। यह जानते हुए भी कि खुले कचरे के विशालकाय ढेर मलेरिया,टाइफाइड कैंसर अथवा अन्य संक्रामक रोगों के जनक हैं, लोग इनसे सीख नहीं ले रहे हैं। अन्यत्र कूड़ा- कचरा फेंकने से वे बाज नहीं आ रहे हैं। यदि हम ऐसा ही करते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब नई-नई बीमारियां मनुष्य को ही नहीं अपितु समस्त जीवधारियों को अपने काल के गाल में ले लेगी।
कूड़े से ऊर्जा उत्पादन में हमें जर्मनी जैसे अग्रणी देशों से सीख लेने की जरूरत है। जर्मनी से सीख लेकर कुछ यूरोपीय देश कूड़े का आयात कर ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं। यद्यपि इसमें सरकार की भूमिका अपेक्षित है। मानव के द्वारा अपशिष्टों का विवेकपूर्ण उपयोग भावी समस्याओं को हल कर सकता है। कूड़े-कचरे को निर्दिष्ट स्थान पर फेंकना, पुष्प या अपशिष्ट पदार्थों को जलाशयों, नदियों में विसर्जित न करना, दूसरों लोगों को भी पर्यावरण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करना आदि विभिन्न तरीकों का उपयोग करके हम स्वहित,परहित एवं राष्ट्रहित के लिए महती भूमिका निभा सकते हैं।
नीरज कुमार झा
विद्यालय अध्यापक (11-12)
उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय
भवानीपुर,नारायणपुर,भागलपुर