गर्मी की तपती दोपहर थी। खेतों के किनारे सात-आठ वृक्षों के झुंड छाया बिखेर रही थी। उनकी शाखाएँ ऐसे फैलीं[...]
Category: हिन्दी कहानी
ज्ञान की सच्ची पहचान- सुरेश कुमार गौरवज्ञान की सच्ची पहचान- सुरेश कुमार गौरव
गाँव के एक सरकारी विद्यालय में रमेश नाम के शिक्षक अन्य शिक्षकों की तरह वे भी पढ़ाते थे। उसकी सादगी,[...]
वायरल होने की ललक – रूचिकावायरल होने की ललक – रूचिका
दीपिका बहुत ही सुंदर थी, मृदुभाषी, पढ़ने-लिखने में अव्वल, कॉलेज में भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता, संगीत प्रतियोगिता इस[...]
दूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शीदूसरा भगवान – संजीव प्रियदर्शी
परामर्श शुल्क के अभाव में दो बार क्लीनिक से लौटाये जाने के बाद वह तीसरी दफे रुपये जुटाकर अपने दस[...]
नमक हराम -संजीव प्रियदर्शीनमक हराम -संजीव प्रियदर्शी
‘रमेश बिल्कुल नमक हराम निकला। कितना समझाया था कि बाबूजी को घर पर रखकर उनकी अच्छी तरह देखभाल किया करना।[...]
धरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शीधरती रो पड़ेगी – संजीव प्रियदर्शी
रमिया और टुनका दहाड़ें मार कर रो रहे थे। रोते भी क्यों नहीं, जिगर का एक ही तो टुकड़ा था[...]
संदिग्ध आँखें-विजय सिंह नीलकण्ठसंदिग्ध आँखें-विजय सिंह नीलकण्ठ
संदिग्ध आँखें बाजार से लौटते समय जिग्नेश की बाइक के दाईं मीरर पर किसी गाड़ी[...]
आशीर्वाद-कुमारी निरुपमाआशीर्वाद-कुमारी निरुपमा
आशीर्वाद माॅं की तबीयत जब भी खराब होती थी मोनिया को पिंकी दीदी के घर[...]
महर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी-हर्ष नारायण दासमहर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी-हर्ष नारायण दास
महर्षि व्यास के प्राकट्य की कहानी राजा उपरिचर, चेदि देश के राजा थे। वे बड़े[...]
अपनी माटी-कुमारी निरुपमाअपनी माटी-कुमारी निरुपमा
अपनी माटी आरुणि के प्रश्नों का जवाब देते देते-देते उसके पापा कभी-कभी झुंझला कर उसे[...]