हिंदी की बिंदी-बीनू मिश्रा - गद्य गुँजन

हिंदी की बिंदी-बीनू मिश्रा

Binu

हिंदी की बिंदी

          प्यारे बच्चों, आप अच्छी तरह से तो पढ़ना लिखना सीख ही गए हो। हिंदी पढ़ते समय आपने कुछ अक्षरों पर बिंदी लगी हुई अवश्य देखी होगी। जैसे— गंगा, चंगा, नंदन, डंडा आदि।
क्या आपने कभी गौर किया है कि बिंदी तो हर जगह एक सी लगी है पर हम उसका उच्चारण विभिन्न तरीके से करते हैं।
जैसे–चन्दा को,च न द संयुक्त आकार, पढ़ेंगे। यानि बिंदी की जगह आधे ‘न’ के रूप में।
हम कभी चंपक को ‘चन्पक’ या नंदन को ‘नम्दन’ नहीं पढ़ते। कुछ और शब्द देखते हैं जहां बिंदी का उच्चारण भिन्न-भिन्न वर्ण के रूप में करते हैं, जैसे- चंपा ‘चम्पा’, ‘गङ्गा’,’ डण्डा’, चंचल को ‘चञ्चल’, पंछी को ‘पञ्छी’ अंधेरा को ‘अन्धेरा आदि ।
सही उच्चारण करने के बावजूद इसका कारण आपको पता नहीं है ना। असल में इस बिंदी के भिन्न-भिन्न उच्चारण के लिए एक नियम है। बिंदी का उच्चारण हम अनुनासिक व्यंजनों के लिए करते हैं। और अनुनासिक व्यंजन पांच हैं, जो इस प्रकार है–ङ, ञ, ण, न और म।
यह अक्षर वर्णमाला के हर वर्ग के अंत में आते हैं।

‘क’ वर्ग–क ख ग घ — ङ
‘च’ वर्ग–च छ ज झ–ञ
‘ट’ वर्ग–ट ठ ड ढ–ण
‘त’ वर्ग–त थ द ध–न
‘प’ वर्ग–प फ ब भ–म

इन पांचों अनुनासिक व्यंजनों के उच्चारण के लिए ही बिंदी का प्रयोग होता है। बिंदी का उच्चारण करते समय इनकी आधे वर्ण का ही उपचार होता है यानी हलंत के रूप में ।
नियम के अनुसार शब्द में बिंदी के बाद वाला अक्षर जिस वर्ग का होता है उस वर्ग के अनुनासिक व्यंजन का उच्चारण बिंदी के स्थान पर होता है।
यदि शब्द में बिंदी के बाद वाला अक्षर क- वर्ग का हुआ तो बिंदी का उच्चारण ‘ङ’ होगा। जैसे- पङ्कज, कङ्घा, पङ्खा आदि।
च- वर्ग का होने पर उच्चारण ‘ञ’ होगा। जैसे-पञ्चम, कञ्चन, आदि।
ट- वर्ग का होने पर उच्चारण ‘ण’ होगा । जैसे- अण्डा, डण्डा आदि।
त- वर्ग का होने पर उच्चारण ‘न’ होगा । जैसे-पन्त, सन्त आदि।
प- वर्ग का होने पर उच्चारण ‘म’होगा ।जैसे- सम्पादक, सम्मान आदि ।

तो बच्चों अब तो आप समझ ही गए होंगे हिंदी की बिंदी वाली कहानी। कैसी लगी आपको, अच्छी लगी ना।

बीनू मिश्रा
नवगछिया, भागलपुर

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