गद्य गुँजन शैक्षणिक,संदेशपरक सम एवं विषम संख्या : प्रियंका वर्मा

सम एवं विषम संख्या : प्रियंका वर्मा



शैक्षणिक गतिविधियां

कभी-कभी शिक्षक कुछ ऐसी परिस्थितियों को रचते हैं जिससे बच्चे अपने आप को आनंदित महसूस करते हैं। वहां उन्हें चीजों के उलझे हुए गुत्थियों को सुलझाने में मजा आता है। वह न तन से थकता है और न मन से। यही ‘जादू की छड़ी’ शैक्षणिक गतिविधि है जो बच्चों के लिए मानसिक टॉनिक का कार्य करती है और सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को सहज कर देती है।

गतिविधि-1

सम एवं विषम संख्या

उद्देश्य: इसकी सहायता से बच्चे रुचिकर तरीके से सम एवं विषम संख्या के बीच अंतर कर पाएंगे एवं संख्याओं को सम एवं विषम की श्रेणी में वर्गीकृत कर लेंगे।
आवश्यक सामग्री: चार्ट पेपर, रंगीन स्केच, कैंची इत्यादि। विधि: सम- विषम संख्याओं की अवधारणा को समझाने के लिए शिक्षण अधिगम सामग्री आधारित गतिविधि का निर्माण इस प्रकार करेंगे।

  • सर्वप्रथम एक चार्ट पेपर को वर्गाकार शीट में काट लें। दो छोटे-छोटे 6 सेंटीमीटर की आयताकार पट्टी काट लें। एक पट्टी पर सम संख्या एवं दूसरे पट्टी पर विषम संख्या लिख दें।
  • बड़े वर्गाकार शीट पर 5 सेंटीमीटर की दूरी के बीच दो आयताकार पेपर को 3 सेंटीमीटर से मोड़ते हुए चिपका दें।
  • ऊपर सम संख्या एवं पेपर खोलने पर उसकी परिभाषा एवं उदाहरण लिखा रहेगा।
  • अब 10-12 छोटे-छोटे बैलून के आकार का पेपर काट लेंगे। उसे पर सम एवं विषम संख्या लिखेंगे। जैसे-2,3,4,5,6,7,18,19, 23 इत्यादि।
  • सम संख्या वाले पेपर के ऊपर सम संख्या वाला एवं विषम संख्या वाले के ऊपर विषम संख्या वाला बैलून को चिपका देंगे।
    प्रयोग: बच्चों से सबसे पहले बैलून पर अंकित अंक की पहचान कराएंगे। उसके बाद उन अंको को दो वर्गों में वर्गीकृत कर देंगे। तब सम एवं विषम संख्या की परिभाषा पट्टी को खोलकर उसमें लिखा हुआ को समझाएंगे।
    अधिगम प्रतिफल: सम एवं विषम संख्या की पहचान बच्चे कर पाएंगे। गतिविधि-2 अंग्रेजी वर्णमाला को बताना

टीएलएम का नाम: अल्फाबेट फिश

उद्देश्य: इसकी सहायता से बच्चे छोटी एवं बड़ी A to Z आनंदायी तरीके से सीख जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को दैनिक जीवन की वस्तुओं से जोड़कर एक रुचकर तरीके से बच्चों के सामने प्रदर्शित कर सीखाना है।
आवश्यक सामग्री: चार्ट पेपर, रंग कलम, कैंची और गोंद इत्यादि।
विधि: टीएलएम को बनाने के लिए हम निम्नलिखित चरणों का अनुसरण करेंगे।

  • चार्ट पेपर पर एक बड़े आकार की मछली बनाकर उसे कैंची की सहायता से काट लेंगे।
  • 26 छोटे आकार के वृताकार पट्टियां काट लें। प्रत्येक पट्टी के एक तरफ बड़ी अक्षरों में ए टू जेड एवं दूसरी तरफ छोटी अक्षरों में ए टू जेड लिख लें। हम मछली में सभी पट्टियों को सुव्यवस्थित ढंग से चिपका देंगे। अब टी एल एम बनकर तैयार है।
    प्रयोग: इसकी शुरुआत हम बच्चों को आनंददायी लगने वाली कहानी से कर सकते हैं। जैसे- बच्चों! तालाब में क्या-क्या रहता है? मछली को कभी खाना खिलाए हो? तब बच्चों को यह मछली को दिखाकर बोलेंगे कि देखो मछली ने कितनी सारी गोलियां खाली हैं। पहले उन गोलियों को गिनेंगे। कुल 26 गोलियां आएंगे। अब बारी-बारी उन पर लिखा अल्फाबेट्स को पढ़ेंगे। उसके बाद उसे पलट कर उस पर लिखी छोटी अक्षरों में अल्फाबेट्स को भी बोलेंगे। बच्चों को यह बताएंगे कि उन्हें अल्फाबेट्स कहते हैं और उन्हें पढ़ने के लिए सिखाएं।
    अधिगम प्रतिफल: इन गतिविधि से बच्चों में अल्फाबेट्स की प्रारंभिक जानकारी मिल जाएगी और इस मछली के साथ खेल-खेल में a b c – – – सीख जाएंगे। गतिविधि-3 5 ज्ञानेंद्रियों की समझ

आवश्यक सामग्री: चार्ट पेपर, रंग कलम, कैंची और गोंद। विधि:

  • एक चार्ट पेपर से छोटे आकार के आयताकार पट्टी काटकर उसे दो भागों में मोड लें।
  • ऊपरी भाग को पांच बराबर भागों में काट लें।
  • पांचों पट्टी पर पांच ज्ञानेंद्रियों के चित्र बना लें, जैसे- नाक,कान, आंख, जीभ और त्वचा।
  • नीचे वाले पट्टी पर उसके कार्यों को संकेत के रूप में चित्र बना दें। जैसे-
    नाक- फूल का चित्र, जिससे खुशबू का संकेत मिले। कान- गाने सुनने का जिससे संकेत मिले।
    इसी तरह सभी का बना लें।
    प्रयोग: सबसे पहले बच्चों को शरीर के अंगों के बारे में क्या जानकारी है? इसे पता करेंगे। उसके बाद बच्चों से उनकी दैनिक जीवन से जुड़ी कुछ बातों को पूछते हुए उनकी रुचि को बढ़ाएंगे। जैसे- हम अपनी मां को किससे देखते हैं? अच्छा भोजन है। यह कैसे पता करते हैं? हम मम्मी की डांट किससे सुनते हैं? तभी हम टीएलएम का उपयोग कर यह अवधारणा स्पष्ट कर सकते हैं कि ये हमारे शरीर के सबसे उपयोगी अंग हैं जिससे हम बाहरी दुनिया को अनुभव करते हैं। तब इसे ज्ञानेंद्रियों की श्रेणी में बांट देंगे। इस तरह बच्चों में ज्ञानेंद्रिय की अवधारणा काफी आसानी से बन जाएगी। अधिगम प्रतिफल: इस टीएलएम के उपयोग के बाद बच्चों में पांच गेंद्रियों की समझ अच्छी तरह से हो जाएगी। वे उनके महत्व एवं कार्यों को अपने अनुभव एवं शब्दों के साथ बता पाएंगे। गतिविधि-4 अक्षर से शब्द निर्माण</code></pre></li>

टीएलएम का नाम: अक्षर से शब्द का सफर।
उद्देश्य: बच्चों को सबसे पहले वर्णमाला के अक्षरों की पहचान करना एवं उसके बाद उन अक्षरों से दो अक्षर, तीन अक्षर, चार अक्षर वाले शब्दों का निर्माण कर सही उच्चारण के साथ पढ़ना सीखना है।
आवश्यक सामग्री: विभिन्न कलर के चार्ट पेपर, रंग कलम, गोंद और कैंची इत्यादि।
निर्माण की विधि: इस शिक्षण अधिगम सामग्री का निर्माण हम निम्न तरीकों से करेंगे।

  • रंगीन चार्ट पेपर की सहायता से लगभग 30 छोटे-छोटे वृताकार टुकड़े काट लेंगे।
  • बड़े आकार के चार्ट पेपर पर तीन कॉलम बना लेंगे। जिसमें ऊपर में एक अक्षर, उसके नीचे दो अक्षर एवं सबसे नीचे तीन अक्षरों के शब्द को व्यवस्थित कर सकेंगे।
  • अब ऊपर के कॉलम में वृताकार टुकड़े को आपस में इस प्रकार चिपकाएं कि वह एक किताब के पेज की तरह खुल जाए। उसके नीचे कुछ टुकड़े को दो जगह चिपकाएं। सबसे नीचे तीन जगह चिपकाएं। अब सभी पर अक्षर लिख दें। प्रयोग: इस गतिविधि से बच्चों को अक्षर पहचान सरल तरीके से कराया जाएगा। सबसे पहले बच्चे ऊपर के पंक्ति में चिपके पट्टी को बारी-बारी से उठाकर अक्षरों की पहचान करेंगे। उसके बाद दूसरी पंक्ति में लिखे दो अक्षर को पहचान कर उनसे शब्द बनाएंगे। जैसे- क+ल=कल। फिर बच्चे तीन अक्षर के शब्द उन पर लिखे अक्षरों से बनाएंगे। जैसे- क+ल+म=कलम। इस तरह बच्चे खुद से शब्द निर्माण करने में काफी रुचि दिखाएंगे एवं जल्द ही सीख जाएंगे।
    अधिगम प्रतिफल: बच्चों को वर्णमाला के सभी अक्षरों की पहचान हो जाएगी। वे स्वयं से शब्द का निर्माण कर सकेंगे। बिना मात्रा वाले शब्दों को पढ़ पाएंगे।
  • गतिविधि (गणित)-5 जोड़ा बनाओ शिक्षक बच्चों को मैदान में ले जाएंगे। शिक्षक बच्चे को गोलाकर में घूमते रहने का निर्देश देंगे। फिर बच्चों को निर्देश देंगे कि आप लोग जोड़ी बनाएं। शिक्षक उन जोड़ों को 1 जोड़ा, 2 जोड़े, 3 जोड़े और 4 जोड़े के समूह—आदि में विभक्त करेंगे।
    अधिगम प्रतिफल:-
    1- मनोरंजन एवं शारीरिक तथा मानसिक हलचल।
    2-सहज रूप से गणितीय अवधारणा(सम संख्या) की पक्कीकरण। गतिविधि (गणित)-6 जोड़े न बन पाए शिक्षक बच्चों को मैदान में ले जाएंगे। शिक्षक बच्चे को गोलाकार में घूमते रहने का निर्देश देंगे। फिर बच्चों को यह निर्देश देंगे कि आप लोग फूट संख्या में समूह बनाएं। यथा-तीन का समूह, पांच का समूह सात का समूह और नौ का समूह —– आदि।
    अधिगम प्रतिफल:-
    1- मनोरंजन एवं शारीरिक तथा मानसिक विकास।
    2-सहज रूप से गणितीय अवधारणा( विषम संख्या) की पक्कीकरण। गतिविधि-7मूक प्रदर्शन (Mime) र्ग-कक्ष में बच्चों से एक-एक करके कोई एक मूक प्रदर्शन करवाया जाए। निर्देश को सही-सही बच्चे समझ सकें, इसलिए शिक्षक पहले कोई एक या दो प्रदर्शन करके दिखाएं। उदाहरण स्वरूप- यदि कोई बच्चा मुंह धोने की क्रिया करता है तो बच्चे समझ जाएंगे कि वह ब्रश कर रहा है। इसी तरह कोई दौड़ने का एक्शन करता है, तो कोई टहलने का।
    अधिगम प्रतिफल:-
    1- आनंद में सीखना।
    2-सुनने और बोलने के कौशल का विकास।
    3- यदि इस गतिविधि को श्याम पट्ट कार्य तक लाया जाए तो पढ़ने एवं लिखने का कौशल का भी विकास होगा।
    निर्देश:-गतिविधि का स्वरूप सरल से कठिन हो। श्यामपट्टू कार्य के समय ध्यान रखना होगा कि बिना मात्रा वाले शब्द पहले तथा मात्रा वाले वाले शब्द बाद में लाया जाए। गतिविधि-8 ठीक पहले एवं ठीक बाद वाली संख्या

उद्देश्य: यह गतिविधि बच्चों को सीखने में उत्साहित करेगी एवं बच्चे स्वयं करके सीखेंगे।
आवश्यक सामग्री: पांच माचिस की खाली डिबिया, चार्ट पेपर स्केच पेन, गोंद और कैंची।
विधि: ठीक बाद एवं ठीक पहले वाली संख्या की अवधारणा स्पष्ट करने के लिए शिक्षण अधिगम सामग्री आधारित गतिविधि का निर्माण इस प्रकार करेंगे:-
चरण-1. सभी माचिस की खाली डिबियों के ऊपरी पृष्ठ पर चार्ट पेपर चिपकाएंगे।
चरण 2.सभी डिब्बियों पर अंक लिखेंगे। जैसे-2,4,6,8,10,12,20,28———।
चरण-3.बड़े डिब्बों के अंदर जो छोटी डिबिया है उसे दो भाग में करके उस पर दो-दो अंक लिखें। जैसे- 1और 3,5 और 7, 9 और 11 आदि। फिर छोटी डिब्बियों को बड़े डिब्बों के अंदर इस तरह डाल दें कि बड़े डिब्बे का अंक सिर्फ दिखाई दे। प्रदर्शन: जब हम उंगली बड़े डिब्ब केे अंदर डालकर ढकेलेंगे तो आगे में अंक प्रदर्शित होंगे। कभी दाएं तरफ उंगली डालकर देखेंगे तो कभी बाएं तरफ। इस प्रकार, 1[ 2] 3, 5 [6] 7—–।
इसका प्रयोग बच्चे काफी आनंदित होकर करेंगे। एक बच्चे को एक डिबिया पर अंगुली रखने को कहेंगे। उसके बाद उस पर अंकित अंक को जोर से बोलने कहें। अब माचिस की डिबिया को पीछे खिसकाएं। उसके बाद उसे ज़ोर से बोलने कहें। पुनः डिबिया को अब आगे की ओर खिसकाएं एवं उसे बोलने कहें। इस प्रकार बच्चे बहुत आसानी से समझ जाएंगे कि ठीक पहले यानि कि पीछे का अंक होगा और ठीक बाद यानि कि आगे का अंक होगा।
अधिगम प्रतिफल: बच्चे किसी भी अंक के पहले एवं बाद में आने वाली संख्या को बता पाएंगे।
शिक्षण पद्धति: नवाचारी गतिविधि एवं कला आधारित शिक्षण अधिगम प्रक्रिया
अभिरुचि: पेंटिंग, सामग्री गतिविधि निर्माण, कोलाज एवं खेल-खेल में शिक्षा देना तथा लेखन

– प्रियंका वर्मा
विद्यालय अध्यापक उत्क्रमित म. वि. मलह विगहा, चंडी, नालंदा

3 Likes
Spread the love

Leave a Reply